मंगलवार, 21 अक्टूबर 2014

दीपावली के दिन किये जाने वाले प्रयोग - पंडित कौशल पाण्डेय +919968550003

दीपावली के दिन किये जाने वाले प्रयोग - पंडित कौशल पाण्डेय +919968550003 



दीपावली पर प्राप्त करे सिद्ध ‘श्री यंत्र’, बीसा यन्त्र और हत्था जोड़ी @ 2100 दीपावली के पावन पर अनेक प्रकार के यन्त्र और तंत्र सिद्ध किये जाते है जैसे लक्ष्मी यन्त्र , बीसा यन्त्र , श्री यन्त्र , कुबेर यन्त्र , सियार सिंगी , हत्था जोड़ी, शंख , जुड़वाँ छुहारा , एकाक्षी नारियल , गोमती चक्र आदि की विधिवत पूजा और मंत्र जाप से आप भी अपने मनोरथ सिद्ध कर सकते है , ऋद्धि-सिद्धि के स्वामी गणेश और धन की देवी लक्ष्मी हैं। इन दोनों का संयुक्त यंत्र श्री यंत्र कहलाता है। इस दिन इस यंत्र की स्थापना से घर में धन-संपत्ति की कमी नहीं रहती है। दीपावली पर फैक्टरी , दुकान आदि में ‘श्री यंत्र’, और ‘कुबेर यंत्र’ की विधिवत स्थापना करने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है,

 लक्ष्मी पूजन का समय स्थिर लग्न में निर्धारित किया जाता है। 
वृष, सिंह, वृश्चिक और कुंभ ये चार स्थिर लग्न हैं। 
दीपावली के समय रात्रि में वृष और सिंह लग्न पड़ता है वृष लग्न संध्या के कुछ उपरांत पड़ता है एवं सिंह लग्न मध्यरात्रि के आस-पास। वृष की अपेक्षा सिंह अधिक प्रभावशाली लग्न है। लेकिन अष्टम और द्वादश भावों की शुद्धि पर ध्यान देना चाहिए अर्थात ग्रहों की स्थिति के अनुसार अष्टम या द्वादश भाव में कोई पापी ग्रह स्थित न रहे। वही लग्न अपेक्षाकृत अधिक उपयुक्त माना जाता है। 
 यदि दोनों लग्न शुद्ध हो तो किसी भी व्यक्ति को सिंह लग्न में लक्ष्मी की पूजा करनी चािहए। यदि वृष लग्न शुद्ध हो एवं सिंह लग्न अशुद्ध, तो वृष लग्न में ही लक्ष्मी पूजन करना ठीक होता है। यदि दोनों लग्न अशुद्ध हों, तो सिंह लग्न में पूजा करनी चाहिए। अधिकांश व्यापारीगण दीपावली की रात्रि में सिंह लग्न के अंतर्गत ही लक्ष्मी पूजा किया करते हैं। वैदिक काल से लेकर वर्तमान काल तक लक्ष्मी का स्वरूप अत्यंत व्यापक रहा है। ऋग्वेद की ऋचाओं में ‘श्री’ का वर्णन समृद्धि एवं सौंदर्य के रूप में अनेक बार हुआ है। 

अथर्ववेद में ऋषि, पृथ्वी सूक्त में ‘श्री’ की प्रार्थना करते हुए कहते हैं ‘‘श्रिया मां धेहि’’ अर्थात मुझे ‘‘श्री’’ की संप्राप्ति हो। श्री सूक्त में ‘श्री’ का आवाहन जातवेदस के साथ हुआ है। 

‘जातवेदोमआवह’ जातवेदस अग्नि का नाम है। अग्नि की तेजस्विता तथा श्री की तेजस्विता में भी साम्य है। विष्णु पुराण में लक्ष्मी की अभिव्यक्ति दो रूपों में की गई दीपावली का सामान्य परिचय लक्ष्मी पूजा के उत्सव के रूप में है। समुद्र मंथन के समय 14 रत्न निकले थे, 

जिनमें पहले रत्न लक्ष्मी अर्थात् ‘श्री’ के प्रकट होने की अंतर्कथा वाला प्रसंग दीपावली का प्रमुख संदर्भ है। पौराणिक महत्व के साथ यह एक व्यावहारिक सच्चाई भी है कि लक्ष्मी की प्रसन्नता सभी के लिए अभीष्ट है। धन वैभव हर किसी को चाहिए। इसलिए उसी अधिष्ठात्री शक्ति की पूजा-आराधना के लिए दीपावली का महापर्व व्यापक रूप से प्रचलित है। दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजन , श्री सूक्त का पाठ और कमलगट्टे की माला से निम्न मंत्र का जाप और हवन करने से लक्ष्मी जी की कृपा प्राप्त होगे , 

निम्न मंत्रो की 11 माला करे इसके पश्चात किसी 108 बार निम्न मंत्र बोलकर हवन करना चाहिए मंत्र: ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद-प्रसीद ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः मंत्र: ऊँ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्नीं च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्।। मंत्र: ऊँ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौं ऊँ ह्रीं क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं सकल ह्रीं सौं ऐं क्लीं ह्रीं श्री ऊँ मंत्र: ऊँ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः मंत्र: ऊँ श्रीं श्रियै नमः दीपावली की अर्द्ध रात्रि में 11 माला ‘‘ऊँ ऐं ह्रीं कलीं चामुण्डायै विच्चे’ का जप करने से सुख-समृद्धि बढ़ती है। जानिए कुछ अनुभूत प्रयोग 
 * दीपावली की सुबह को गन्ने की जड़ को लाकर रात्रि को लक्ष्मी पूजन में इसकी भी पूजा करने से धन लाभ मिलता है। 
* दीपावली के शुभ मुहूर्त से प्रारम्भ करके प्रत्येक अमावस्या को किसी अपंग या विकलांग भिखारी को भोजन कराएं। धन-समृद्धि में सर्वदा ’वृद्धि होती रहेगी। 
 * दीपावली के दिन पति-पत्नी सुबह विष्णु मंदिर में एक साथ जाएं और वहां लक्ष्मी को वस्त्र चढ़ाएं, धन की कमी नहीं रहेगी। लक्ष्मी पूजन के समय लक्ष्मी को कमल अर्पित करें और कमल गट्टे की माला से जाप करें, लक्ष्मी अधिक प्रसन्न होती है। 
* दीपावली वाले दिन दोपहर के समय पीपल के पेड़ की छाया में खड़े होकर चीनी, दूध और घी मिलाकर उसे उस वृक्ष की जड़ में डालंे, अभूतपूर्व आर्थिक समृद्धि होगी। यदि आप का पैसा कहीं फंस गया है तो दीपावली के दिन प्रातःकाल जल में लाल मिर्च के 21 बीज डालकर सूर्य को अर्पित करें। आप का फंसा हुआ पैसा निकल आयेगा। 
* दीपावली के दिन बहेड़ा वृक्ष के फल की पूजा कर के लाल वस्त्र में रखने से धन की वृद्धि होती है। 
* सिंदूर, सात कौड़ी, कमल के फूल व श्री यंत्र को किसी चाँदी के पात्र में रख कर दीपावली की रात्रि में अपने धन स्थान पर प्रतिष्ठापित करें, आर्थिक उन्नति की निरंतरता सर्वदा बनी रहेगी। 
* दीपावली के शुभ मुहूर्त में साबुत नारियल को चमकीले लाल रंग के कपड़े में लपेटकर अपने धन-स्थान पर प्रतिष्ठापित करें। आर्थिक समृद्धि सर्वदा बनी रहेगी। 
* दीपावली के दिन गोधूलि काल में तुलसी के पौधे को जल अर्पित करने के पश्चात् उसके समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित करें तथा इस प्रक्रिया को सात शुक्रवार तक दोहराएं। इस दौरान धूप, अगरबत्ती आदि का प्रयोग अवश्य करें, धन-समृद्धि की वृद्धि का क्रम सर्वदा चलता रहेगा। 
* दीपावली के शुभ मुहूर्त में तीन पीली कौड़ी, तीन कमलगट्टे व एक साबुत सुपारी को लाल रंग के कपड़े में लपेट कर तिजोरी या धन-स्थान पर स्थापित करें तथा प्रत्येक शुक्रवार को इसे धूप व अगरबत्ती दिखाया करें। ख़ज़्ााना सर्वदा भरा रहेगा। 
* कर्ज से मुक्तिः- दीपावली की रात्रि में अशोक के वृक्ष के समक्ष गायं के घी का दीपक प्रज्वलित करें तथा इस प्रक्रिया को नित्य सात रात्रि तक दोहराते रहें। शीघ्र ही कर्ज से मुक्ति मिलने लगेगी। 
* दीपावली के शुभ मुहूर्त में कौड़ी व हरसिंगार की जड़ को पीले कपड़े में लपेटकर ताबीज स्वरूप गले या अपनी दाहिनी भुजा में धारण करें। शीध्र ही कर्ज उतरने लगेगा। 
* पारिवारिक-समृद्धिः- दीपावली की रात्रि में परिवार के सभी सदस्यों के सिर के ऊपर से काले तिल को सात बार उतार कर घर की पश्चिम दिशा की ओर फेंक दें। ऐसा करने से पारिवारिक सुख पर आने वाली कोई भी नकारात्मक बला शीध्र ही उतर जाती है। 
* दीपावली की शाम पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल के दीपक को प्रज्वलित करें तथा इस प्रक्रिया को नियमित रूप से प्रत्येक शनिवार को दोहराते रहें। ऐसा करना पारिवारिक समृद्धि के लिए अत्यंत लाभप्रद होता है। 
* दीपावली की रात्रि घर के प्रत्येक कमरे में शंख व डमरू बजाएं, घर में व्याप्त कोई भी नकारात्मक ऊर्जा शीघ्र ही समाप्त हो जाएगी। दीपावली पूजन के बाद शंख और डमरू बजाने से दरिद्रता जाती है और लक्ष्मी आती है। 
* शत्रु से सुरक्षाः- दीपावली की रात्रि एक मुट्ठी उड़द के दानों पर शत्रु के नाम का मनन करके उन्हंे किसी निर्जन स्थान पर दबा दें तथा उस के ऊपर नींबू निचोड़ दें। शत्रु का क्रोध समाप्त हो जाएगा। 
* दीपावली की रात्रि एक मुट्ठी शक्कर व तिल मिश्रित करें तथा शत्रु के नाम का मनन कर के उसे किसी निर्जन स्थान पर दबा दें। शत्रु के हृदय में आप के प्रति करूणा उत्पन्न होने लगेगी। 
* दीपावली की रात्रि एक साबुत नींबू के ऊपर शत्रु का नाम लिखकर किसी बहते दरिया में प्रवाहित कर दें। शत्रु के हृदय में मित्रता के भाव उत्पन्न होने लगेगें। दीपावली के शुभ मुहूर्त में पीपल की जड़ को अभिमंत्रित करें तथा उसे चांदी के ताबीज़्ा में डाल कर गले में धारण करें। आपसी शत्रुता प्रेम में बदलने लगेगी।

शुभ मुहूर्त में करे दीपावली पूजन :- पंडित कौशल पाण्डेय 09968550003

शुभ मुहूर्त में करे दीपावली पूजन :- पंडित कौशल पाण्डेय 09968550003 कार्तिक कृष्ण अमावश्या दिन गुरुवार को श्री महालक्ष्मी पूजन किया जायेगा , इस बार दीपावली में विशेष संयोग बन रहा है, जो राज्य व देश के लिए उत्तम है. गुरुवार को शाम चार बजे चंद्रमा तुला राशि में प्रवेश कर रहा है. साथ ही तुला राशि में सूर्य, चंद्र, शुक्र व शनि चार ग्रहों की युति हो रही है. शनि उच्च राशि का और सूर्य नीच राशि का है. हालांकि उच्च ग्रह के साथ नीच ग्रह की युति भी फलदायक होती है. इससे शनि के साथ सूर्य भी उत्तम फल देनेवाला है. दीपावली में अमावस्या तिथि, प्रदोष काल, शुभ लग्न व चौघडि़या मुहूर्त का विशेष महत्व है. इस दिन सूर्यास्त 5.37 बजे होगा. इस अवधि से लेकर 8.14 बजे तक प्रदोष कल रहेगा. इस समय दीपावली पूजन करना अति उत्तम रहेगा. साथ ही प्रदोष काल के स्थिर लग्न में पूजन करना उत्तम है. जो शाम 6.41 बजे से 8.37 बजे तक रहेगा. इस समय प्रदोष काल व स्थिर लग्न के साथ होने से पूजा करना शुभ फलदायी है. इस दिन अमावश्या तिधि मध्यरात्रि उपरांत 3 बजकर 26 मिनट तक रहेगी , चित्रा नक्षत्र रात्रि 4 बजकर 2 मिनट तक रहेगा , गुरुवार को चित्रा से बना चर योग सर्वसिद्धिदायक रहेगा। आज के दिन राहुकाल दिन में 1:30 pm से 3pm बजे तक रहेगा *शुभ मुहूर्त में करे दीपावली पूजन* इस दिन गृहस्थ और व्यापारी दोनों वर्गों के लोग पूजा करते हैं. व्यापारी इस दिन बही-खाता बदलते हैं, वहीं, गृहस्थ प्रदोष काल में महालक्ष्मी की पूजा कर सुख समृद्धि की कामना करते हैं. शास्त्रों के अनुसार दीपावली में गोधूलि लग्न से आरंभ होनेवाली पूजा महानिशिथ काल अर्थात अर्धरात्रि तक की जाती है. ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार स्थिर लग्न में वृष , सिंह, वृश्चिक, कुम्भ ये चार लग्न पूजा के लिए सर्वोत्तम समय माना गया है. गुरुवार के दिन अमावश्या होने के कारण आज धनु लग्न में पूजा करना व्यापारी वर्ग के लिए शुभ है क्योंकी धनु राशि का स्वामी गुरु को माना गया है धनु लग्न 10:37 से 12:41 तक है मीन लग्न 15:45 से 17:21 तक है चर का चौघड़िया भी 10:41 से शुरू होगा जो पूजा और हवन के लिए शुभ समय है मकर लग्न 12:41 से 14:25 तक रहेगा, जिसमे लाभ अमृत का चौघड़िया श्रेष्ठा तो राहुकाल नष्ट रहेगा लग्नेश शनि कर्म और कार्य क्षेत्र में बढ़ोत्तरी करेगा साथ ही लग्न पर उच्च गुरु का प्रभाव और भी शुभ है कुम्भ लग्न 14:25 से 15:54 तक रहेगा साथ ही दोपहर 3 बजे राहु काल समाप्त हो जायेगा घर में दीपावली पूजन और रात्रि के लग्न मुहूर्त ---- दीपावली की रात्रि बेला में अमृत, चर , रोग, काल, लाभ , उद्वेग , शुभ और अमृत के 8 चौघड़िया मुहूर्त आयेगे सायंकाल 17:40 से अमृत का चौघड़िया शुरू होगा 19:15 से चर का चौघड़िया ,20:52 से रोग का और 22:28 से काल का , 24:4 से लाभ का चौघड़िया शुरू होगा जो की रात्रि 1 बजकर 47 मिनट तक रहेगा मेष लग्न सायं 17:21 से प्रारम्भ वृष लग्न रात्रि 18:58 से चर का चौघड़िया और वृष राशि दोनों का स्वामी शुक्र है , इस लग्न में पूजा करना और भी शुभ है मिथुन लग्न रात्रि 20:55 से प्रारम्भ होकर 23:9 तक रहेगा लग्नेश बुध राहु से ग्रसित है साथ ही रोग का चौघड़िया 20:52 से शुरू होगा जो उतना शुभ नहीं होता है , इसके लिए पहले बुध का पूजन कराकर दीपावली का पूजन करने से शुभ परिणाम मिलेंगे कर्क लग्न 23:09 से प्रारम्भ होकर रात्रि 01:28 रहेगा , इस समय माँ लक्ष्मी का समुद्र से पादुर्भाव हुआ था जी निशिथकाल माना गया है इस समय घर में माँ लक्ष्मी का पूजन और हवन करने से माँ लक्ष्मी का भंडार हमेशा भरा रहता है इस वर्ष प्रदोष काल सूर्यास्त के 6 घटी अर्थात रात्रि 20: 4 तक महालक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है. उसके बाद तांत्रिक जगत व मंत्र सिद्धि के लिए सिंह लग्न में पूजा करना उत्तम माना गया है, जो अर्धरात्रि 1.28 बजे से प्रारम्भ होगा दीपावली के इस पर्व पर प्रकाश की प्रत्येक किरण आपके जीवन में स्वास्थ्य, सुख, समृद्धि और खुशियों की स्वर्णिम सौगात व सन्देश लाये, यही मेरी शुभ कामना ... मंगलकामनाओं सहित दीपावली के पावन पर्व की आपको सपरिवार बधाई व हार्दिक शुभकामनाएँ. पंडित कौशल पाण्डेय 09968550003

Pandit Kaushal Pandey

पित्र दोष कारन और निवारण :- कौशल पाण्डेय +919968550003

पित्र दोष कारन और निवारण :- कौशल पाण्डेय +919968550003  ज्योतिष शास्त्र में अनेक योग ऐसे है कि उनसे पता चलता है कि हमारे जीवन में जन्म से पू...