रविवार, 7 दिसंबर 2014

अंक ज्योतिष :- पंडित कौशल पाण्डेय +919968550003


#अंक ज्योतिष :- पंडित कौशल पाण्डेय +919968550003 



अंक ज्योतिष के अनुसार जन्म तारीख के कुल योग को मूलांक कहते है , DD :MM :YYYY के कुल योग को भाग्यांक कहते है, मूलांक और भाग्यांक के अनुसार काम करने से जीवन में रुके हुए काम पुरे होते चले जाते है :- अंकज्योतिष में नौ ग्रहों सूर्य, चन्द्र, गुरू, यूरेनस, बुध, शुक्र, वरूण, शनि और मंगल की विशेषताओं के आधार पर गणना की जाती है।

इन में से प्रत्येक ग्रह के लिए 1 से लेकर 9 तक कोई एक अंक निर्धारित किया गया है, कौन से ग्रह पर किस अंक का असर होता है। ये नौ ग्रह मानव जीवन पर गहरा प्रभाव डालते हैं। 

आइये जाने किस अंक का कौन स्वामी है :- 
जन्म तारीख 1, 10, 19, 28 का मूलांक 1 का स्वामी सूर्य है 
2, 11, 20, 29 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक- 2 स्वामी चंद्रमा
 3, 12, 21, 30 मूलांक- 3, स्वामी गुरू
 4, 13, 22, 31 मूलांक 4 का स्वामी- राहु 
5, 14, 23 मूलांक 5 स्वामी बुध 
6, 15, 24 मूलांक 6 स्वामी शुक्र 
7, 16, 25 मूलांक 7 स्वामी केतु 
8, 17, 26 मूलांक 8 स्वामी- शनि- 
9, 18, 27 मूलांक 9 स्वामी मंगल 

आइये जाने भाग्यशाली अंक, अंको के रंग और शुभ दिशा मूलांक 
1 : यह अंक स्वतंत्र व्यक्तित्व का धनी है। इससे संभावित अंह का बोध, आत्म निर्भरता, प्रतिज्ञा, दृढ़ इच्छा शक्ति एवं विशिष्ट व्यक्तित्व दृष्टि गोचर होता है। इसके स्वामी सूर्य हैं. जिस व्यक्ति का जन्म समय 21 जुलाई से 28 अगस्त के मध्य हो, का प्रभाव सूर्य के नियंत्रण में होता है, 

इनके लिए शुभ तिथि 1,10,19 एवं 28 तारीख है. चार अंक से इनका जबरदस्त आकर्षण होता है. इनके लिए शुभ दिन रविवार एवं सोमवार है, तो शुभ रंग पीला, हरा एवं भूरा है. ये अपने ऑफिस, शयनकक्ष परदे, बेडशीट एवं दीवारों के रंग इन्हीं रंगों में करें, तो भाग्य पूर्णत: साथ देता है. इस मूलांक के व्यक्ति शासन के शीर्ष पद पर देखे जाते हैं. छह एवं आठ अंक वाले इनके शत्रु हैं. इनकी शुभ दिशा ईशान कोण है. 

मूलांक 2 : अंक दो का संबंध मन से है। यह मानसिक आकर्षण, हृदय की भावना, सहानुभूति, संदेह, घृणा एवं दुविधा दर्शाता है। इसका प्रतिनिधित्व चन्द्र को मिला है, इस अंक का स्वामी चंद्रमा है 2,11, 20, 29 तारीख अति शुभ हैं. रविवार, सोमवार एवं शुक्रवार श्रेष्ठ दिन हैं. सफेद एवं हल्का हरा इनके शुभ रंग हैं.

 मूलांक 3 : इस अंक के स्वामी देव गुरु वृहस्पति हैं .इससे बढ़ोत्तरी, बुद्धि विकास क्षमता, धन वृद्धि एवं सफलता मिलती है। 3, 12, 21 एवं 30 तारीख इनके लिए विशेष शुभ हैं. मंगलवार, गुरुवार एवं शुक्रवार श्रेष्ठ है. पीला एवं गुलाबी रंग अतिशुभ है. शुभ माह जनवरी एवं जुलाई है. दक्षिण, पश्चिम एवं अग्नि कोण श्रेष्ठ दिशा है. 

मूलांक 4 : इस अंक से मनुष्य की हैसियत, भौतिक सुख संपदा, सम्पत्ति, कब्जा, उपलब्धि एवं श्रेय प्राप्त होता है। इसका प्रतिनिधि हर्षल और राहु हैं. 2, 11, 20 एवं 29 तारीख शुभ है. रविवार, सोमवार एवं शनिवार श्रेष्ठ दिन हैं, जिसमें शनिवार सर्वश्रेष्ठ है. नीला एवं भूरा रंग शुभ है. 

मूलांक 5 : इस अंक का स्वामी बुध है. शुभ तिथि 5, 14 एवं 23 है. सोमवार, बुधवार एवं शुक्रवार श्रेष्ठ है. उसमें शुक्रवार सर्वाधिक शुभ है. सफेद, खाकी एवं हल्का हरा रंग इनके लिए शुभ है. इनके लिए अशुभ अंक 2, 6 और 9 है. 

मूलांक 6 : इस अंक का स्वामी शुक्र है. छह का अंक वैवाहिक जीवन, प्रेम एवं प्रेम-विवाह, आपसी संबंध, सहयोग, सहानुभूति, संगीत, कला, अभिनय एवं नृत्य का परिचायक है।शुभ तिथि माह की 6,15 एवं 24 तारीख है. मंगलवार, गुरुवार एवं शुक्रवार श्रेष्ठ दिन है जिसमें शुक्रवार सर्वश्रेष्ठ है. आसमानी, हल्का एवं गहरा नीला एवं गुलाबी रंग शुभ हैं. लाल एवं काले रंग का प्रयोग वर्जित है. 

मूलांक 7 : इस अंक का स्वामी केतु है. सात का अंक आपसी ताल मेल, साझेदारी, समझौता, अनुबंध, शान्ति, आपसी सामंजस्य एवं कटुता को जन्म देता है।महीना के 7, 16 एवं 25 तारीख सर्वश्रेष्ठ है. 21 जून से 25 जुलाई तक का समय भी श्रेष्ठ है. रविवार, सोमवार एवं बुधवार श्रेष्ठ हैं. जिसमें सोमवार सर्वश्रेष्ठ है. शुभ रंग हरा, सफेद एवं हल्का पीला है. 

मूलांक 8 : इस अंक का स्वामी शनि हैं. 8, 17 एवं 26 तारीख श्रेष्ठ तिथि हैं.शनि का अंक होने से इस अंक से क्षीणता, शारीरिक मानसिक एवं आर्थिक कमजोरी, क्षति, हानि, पूर्ननिर्माण, मृत्यु, दुःख, लुप्त हो जाना या बहिर्गमन हो जाता है, रविवार, सोमवार एवं शनिवार शुभ हैं. जिसमें शनिवार सर्वाधिक शुभ है. भूरा, गहरा नीला, बैगनी, सफेद एवं काला शुभ रंग है. हृदय एवं वायु रोग इनके प्रभाव क्षेत्र हैं. दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम एवं दक्षिण-पूर्व दिशा शुभ हैं. 

मूलांक 9 : अंक नौ का स्वामी मंगल है. इस मूलांक के लोगों पर मंगल ग्रह का प्रभाव सर्वाधिक है.यह अन्तिम ईकाई अंक होने से संघर्ष, युद्ध, क्रोध, ऊर्जा, साहस एवं तीव्रता देता है। इससे विभक्ति, रोष एवं उत्सुकता प्रकट होती है। इसका प्रतिनिधि मंगल ग्रह है जो युद्ध का देवता है 9, 18 एवं 27 श्रेष्ठ तारीख है. मंगलवार, गुरुवार एवं शुक्रवार शुभ दिन है. गहरा लाल एवं गुलाबी शुभ रंग है. पूर्व, उत्तर-पूर्व एवं उत्तर-पश्चिम दिशा अतिशुभ हैं. हनुमान जी की अराधना श्रेष्ठ है.

अधिक जानकारी के लिए मिले अथवा संपर्क करे 
पंडित कौशल पाण्डेय
श्री राम हर्षण शांति कुञ्ज , दिल्ली
+919968550003

राहुकाल:- पंडित कौशल पाण्डेयl +919968550003


राहुकाल- पंडित कौशल पाण्डेय




 राहुकाल में शुभकार्य करना वर्जित हैं। ऐसा माना जाता है कि यह समय क्रुर ग्रह राहु के नाम से है जो पाप ग्रह माना गया है। इसलिए इस समय में जो भी कार्य किया जाता है वो पाप ग्रस्त हो जाता है और असफल हो जाता है। 

रविवार को शाम 04:30 से 06 बजे तक राहुकाल होता है। 
सोमवार को दिन का दूसरा भाग यानि सुबह 07:30 से 09 बजे तक राहुकाल होता है। 
मंगलवार को दोपहर 03:00 से 04:30 बजे तक राहुकाल होता है। 
बुधवार को दोपहर 12:00 से 01:30 बजे तक राहुकाल माना गया है। 
गुरुवार को दोपहर 01:30 से 03:00 बजे तक का समय यानि दिन का छठा भाग राहुकाल होता है। 
शुक्रवार को दिन का चौथा भाग राहुकाल होता है। यानि सुबह 10:30 बजे से 12 बजे तक का समय राहुकाल है। शनिवार को सुबह 09 बजे से 10:30 बजे तक के समय को राहुकाल माना गया है। 

कई बार हम कही घर से बहार जाते है और हमें बिना कारन ही परेशानी होती है , वो दिशा शूल होता है , आप अपनी यात्रा को सुखद पूर्वक और मंगलमय बनाने के लिए ये उपाय करे - सोमवार और शनिवार को पूर्व (East) दिशा रविवार और शुक्रवार को पश्चिम (West) दिशा मंगल वार और बुधवार को उत्तर (North( दिशा गुरु वार को दक्षिण (South) दिशा सोमवार और गुरूवार को (अग्ने ) south east रविवार और शुक्रवार को (नेतरअगये ) south west मंगलवार को (वायवे ) north west बुध और शनि को (ईशान ) north east दिशा शूल होता है| अर्थात इस दिन इन दिशायो की और यात्रा नहीं करनी चाहिए|बुध को उत्तर दिशा का स्वामी होते हुए भी बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा निषिद है| दिशा शूल से बचा जा सकता है और आप अपनी यात्रा को मंगलमय बना सकते है| रविवार = दलिया और घी खा करे जाये . सोमवार = दर्पण देख कर जाये . मंगलवार = गुड खा कर जाये . बुधवार = धनिया या तिल खा कर जाये . वीरवार = दही खा कर जाये . शुक्रवार = जों खा कर जाये . शनिवार = अदरक या उड़द खा कर जाये .

अधिक जानकारी के लिए मिले अथवा संपर्क करे 
पंडित कौशल पाण्डेय
श्री राम हर्षण शांति कुञ्ज , दिल्ली
+919968550003

मांगलिक दोष या योग :- पंडित कौशल 09968550003


मांगलिक दोष या योग :- पंडित कौशल अधिकांश ज्योतिषी सिर्फ मंगल ग्रह को १,४,७,८,१२ भाव में होने से ऐसे जातक की कुंडली में मांगलिक दोष बता देते है साथ में ये भी बता देते है की कोई शुभ ग्रह देख रहा हो तो दोष हट जाता है या कुछ साल के बाद मंगल अपना प्रभाव नहीं दिखाता है , मांगलिक दोष की अनेक भ्रान्तिया इस समाज में फैली है अगर लड़का मांगलिक है तो उसे मांगलिक से ही विवाह करना चाहिए या उसे पत्नी सुख नहीं मिलेगा मेरे हिसाब से ऐसा कुछ नहीं है ज्योतिष में मंगल को सेनापति कहा गया है और यह ऊर्जावान ग्रह हैं, जिसे लोग मांगलिक दोष मान रहे हैं वो दोष नहीं बल्कि एक मांगलिक योग है। दांपत्य जीवन में स्त्री तथा पुरुष दोनों को समान रूप से प्रभावित करने वाले ग्रह की दोषपूर्ण स्थिति को मंगल दोष नाम दे दिया गया। ज्योतिषीय सिद्धांतों के अनुसार अशुभ ग्रह जिस भाव में बैठते हैं, उसी की हानि करते हैं। अतः भावी वर, या वधू की कंडली में लग्न भाव (शरीर), सुख भाव (चतुर्थ भाव) दांपत्य भाव (सप्तम भाव) आयु भाव (अष्टम स्थान) तथा शैय्या सुख भाव (द्वादश स्थान) में पाप ग्रहों की स्थिति दांपत्य जीवन के लिये दुःखद कही गयी है। अष्टम भाव से वैधव्य, लग्न से शरीर सुख, सप्तम से सौभाग्य तथा पंचम से संतानोत्पत्ति का विचार होता है। लग्नस्थ पाप ग्रह शरीर को रोगी करते हैं। वे शरीर के लिए कष्टकारक होते हैं। अष्टम भाव पति/पत्नी का मारक स्थान है। इस स्थान में पाप ग्रहों का होना आयु के लिए हानिकारक है।

कालशर्प दोष के निवारण के लिए रुद्राभिषेक :पंडित कौशल पाण्डेय 09968550003


कालशर्प दोष के निवारण के लिए रुद्राभिषेक 22 दिसम्बर 2014 को निर्धारित किया गया है श्री राम हर्षण शांति कुञ्ज संस्था द्वारा शिव शक्ति मंदिर यमुना विहार , दिल्ली में कालशर्प दोष के निवारण के लिए रुद्राभिषेक का विशाल आयोजन किया जा रहा है , कृपया नाम पता गोत्र समय से पूर्व बता कर पूजन में भाग लेने का समय निर्धारित करे पंडित कौशल पाण्डेय 09968550003

सफलता और असफलता :- Astrologer Kaushal 09968550003


सफलता और असफलता आत्मविश्वास सफलता का प्रथम रहस्य है जिनके अंदर आत्मविश्वास नहीं है तो सफलता की राह में बहुत देर से आते है एक सफल इन्शान के पीछे उसका आत्मविश्रास होता है जिन्हे खुद पर भरोसा है उसके लिए कुछ भी मुस्किल नहीं है प्रायः असफलता जीवन में तभी आती है जब इन्शान दो नावों पर सवार होता है , असफल व्यक्ति समय नष्ट करते हुए, अपनी परेशानियां बढ़ा लेते हैं जिसे समय की चिंता नहीं है वो ही असफल है समय भी उसी का साथ देता है जो समय के साथ चले इन्शान एक बार असफल हो जाये तो उसे चिंता नहीं करनी चाहिए , जब भी असफल हों, तो स्वयं से पूछें कि आपने कितनी बार प्रयास किया और कितनी बार निराश हुए। इससे आप अपनी दृढ़ता परख सकते हैं। यह एक कड़वी सच्चाई है कि सफलता का हमारी दृढ़ता से गहरा नाता है। इसे पकडे रहेंगे तो दुनिया में बड़े-से-बड़ा काम कर सकते हैं। केवल एक या दो पराजय को, अंतिम पराजय मान लेने की गलती न करें। असफलता आपको अपनी कमियों से ऊपर उठा कर, दोबारा कोशिश करने का अवसर देती है। आप एक असफल व्यक्ति हैं। जब तक आप में दोबारा कोशिश करने की ताकत है, तब तक आप स्वयं को असफल नहीं मान सकते। लोग असफलताओं से ऊपर उठ कर ही तो सफल होते हैं।

प्रार्थना में अद्भुत शक्ति समाहित है :- पंडित कौशल पाण्डेय 0996855000


प्रार्थना में अद्भुत शक्ति समाहित है :- पंडित कौशल पाण्डेय प्रायः सभी धर्मो में प्रार्थना , दुआ करना बताया गया है यह ब्रह्माण्ड में सबसे तेज गति से चलती है समूह में की गई प्रार्थना तुरंत चमत्कार दिखती है , सच्चे मन से की गई प्रार्थना ईश्वर को भी स्वीकार होती है , प्रार्थना ईश्वर से जोड़ने का काम करती है, ईश्वर से सच्चे दिल से निवेदन करना ही प्रार्थना है हृदय में जैसे भाव उठेंगे, ईश्वर तक प्रार्थना उसी रूप में फलीभूत होगी। आप ईश्वर के प्रति जिस भावना से प्रार्थना करते हैं, ईश्वर भी उसी रूप में उसे स्वीकार करता है। अत: मन तथा हृदय का पवित्र होना नितांत ही जरूरी है। प्रायः स्कूलों में एक प्रार्थना होती है - इतनी शक्ति हमें देना दाता मन का विश्वास कमज़ोर हो न हम चलें नेक रस्ते पे हमसे भूल कर भी कोई भूल हो न.. जब हमें कोई रास्ता नहीं सूझ रहा हो और हम अगर सच्चे मन से प्रार्थना करें तो हमें ईश्वर से मार्गदर्शन प्राप्त होता है। कैसे करें प्रार्थना : ईश्वर, भगवान, देवी-देवता या प्रकृति के समक्ष प्रार्थना करने से मन और तन को शांति मिलती है। मंदिर, घर या किसी एकांत स्थान पर खड़े होकर या फिर ध्यानमुद्रा में बैठककर दोनों हाथों को नमस्कारमुद्रा में ले आए। अब मन-मस्तिष्क को एकदम शांत और शरीर को पूर्णत: शिथिल कर लें और आंखें बद कर अपना संपूर्ण ध्यान अपने इष्ट पर लगाएं। 15 मिनट तक एकदम शांत इसी मुद्रा में रहें तथा सांस की क्रिया सामान्य कर दें। प्रार्थना से मन स्थिर और शांत रहता है। इससे क्रोध पर नियंत्रण पाया जा सकता है। इससे स्मरण शक्ति और चेहरे की चमक बढ़ जाती है। प्रतिदिन इसी तरह 15-20 मिनट प्रार्थना करने से व्यक्ति अपने आराध्य से जुड़ने लगता है और धीरे-धीरे उसके सारे संकट समाप्त होने लगते हैं। प्रार्थना से मन में सकारात्मक ऊर्जा का विकास होता है तथा शरीर निरोगी बनता है।

क्यों किया जाता है पूर्णिमा का व्रत :- पंडित कौशल पाण्डेय 09968550003

क्यों किया जाता है पूर्णिमा का व्रत :- पंडित कौशल पाण्डेय मार्गशीर्ष की पूर्णिमा के दिन श्री दत्तात्रेय जयंती मनाई जाती है।भगवान श्री दत्तात्रेय जयंती के पावन अवसर पर सभी भक्तों को शुभ कामनाएं। ब्रह्म, विष्णु व महेश के अंशावतार महर्षि दत्तात्रेय के बाल रूप का पूजन भी 6 दिसंबर को किया जायेगा । मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की पूजा का विधान शास्त्रों में बताया गया है। सूर्य से चन्द्र का अन्तर जब 169° से 180° तक होता है, तब शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा रहती है। पूर्णिमा के स्वामी स्वयं चन्द्र देव हैं। पूर्णिमान्त काल में सूर्य एवं चन्द्र एकदम आमने-सामने (समसप्तक) होते हैं। इसका विशेष नाम ‘सौम्या’ है। यह पूर्णा तिथि है। इसे 'राका' तथा 'अनुमिति' भी कहते हैं। इसी तिथि को शुक्ल पक्ष का अन्त होता है। पूर्णिमा तिथि की दिशा वायव्य है। यदि इस दिन एक समय भोजन करके पूर्णिमा, चंद्रमा अथवा सत्यनारायण का व्रत करें तो सब प्रकार के सुख, सम्पदा और श्रेय की प्राप्ति होती है। प्रत्येक माह की पूर्णिमा तिथि को सत्यनारायण व्रत रखा जाता है, कभी-कभी यह व्रत चतुर्दशी तिथि में भी रखा जाता है क्योंकि चन्द्रोदय कालिक एवं प्रदोषव्यापिनी पूर्णिमा ही व्रत के लिए ग्रहण करनी चाहिए. सत्यनारायण व्रत में कथा, स्नान-दान आदि का बहुत महत्व माना गया है. इस व्रत में सत्यनारायण भगवान अर्थात विष्णु जी की पूजा की जाती है. सारा दिन व्रत रखकर संध्या समय में पूजा तथा कथा की जाती है. पूजा के उपरान्त भोजन ग्रहण किया जाता है. मान्यता यह भी है कि इस दिन व्यक्ति जो कुछ दान करता है वह उसके लिए स्वर्ग में संरक्षित रहता है जो मृत्यु लोक त्यागने के बाद स्वर्ग में उसे पुनःप्राप्त होता है। यदि इस पूर्णिमा के दिन भरणी नक्षत्र हो तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है, अगर रोहिणी नक्षत्र हो तो इस पूर्णिमा का महत्व कई गुणा बढ़ जाता है। इस दिन कृतिका नक्षत्र पर चन्द्रमा और बृहस्पति हों तो यह महापूर्णिमा कहलाती है। कृतिका नक्षत्र पर चन्द्रमा और विशाखा पर सूर्य हो तो “पद्मक योग” बनता है जिसमें गंगा स्नान करने से पुष्कर से भी अधिक उत्तम फल की प्राप्ति होती है।

Pandit Kaushal Pandey

पित्र दोष कारन और निवारण :- कौशल पाण्डेय +919968550003

पित्र दोष कारन और निवारण :- कौशल पाण्डेय +919968550003  ज्योतिष शास्त्र में अनेक योग ऐसे है कि उनसे पता चलता है कि हमारे जीवन में जन्म से पू...