रविवार, 7 दिसंबर 2014

मांगलिक दोष या योग :- पंडित कौशल 09968550003


मांगलिक दोष या योग :- पंडित कौशल अधिकांश ज्योतिषी सिर्फ मंगल ग्रह को १,४,७,८,१२ भाव में होने से ऐसे जातक की कुंडली में मांगलिक दोष बता देते है साथ में ये भी बता देते है की कोई शुभ ग्रह देख रहा हो तो दोष हट जाता है या कुछ साल के बाद मंगल अपना प्रभाव नहीं दिखाता है , मांगलिक दोष की अनेक भ्रान्तिया इस समाज में फैली है अगर लड़का मांगलिक है तो उसे मांगलिक से ही विवाह करना चाहिए या उसे पत्नी सुख नहीं मिलेगा मेरे हिसाब से ऐसा कुछ नहीं है ज्योतिष में मंगल को सेनापति कहा गया है और यह ऊर्जावान ग्रह हैं, जिसे लोग मांगलिक दोष मान रहे हैं वो दोष नहीं बल्कि एक मांगलिक योग है। दांपत्य जीवन में स्त्री तथा पुरुष दोनों को समान रूप से प्रभावित करने वाले ग्रह की दोषपूर्ण स्थिति को मंगल दोष नाम दे दिया गया। ज्योतिषीय सिद्धांतों के अनुसार अशुभ ग्रह जिस भाव में बैठते हैं, उसी की हानि करते हैं। अतः भावी वर, या वधू की कंडली में लग्न भाव (शरीर), सुख भाव (चतुर्थ भाव) दांपत्य भाव (सप्तम भाव) आयु भाव (अष्टम स्थान) तथा शैय्या सुख भाव (द्वादश स्थान) में पाप ग्रहों की स्थिति दांपत्य जीवन के लिये दुःखद कही गयी है। अष्टम भाव से वैधव्य, लग्न से शरीर सुख, सप्तम से सौभाग्य तथा पंचम से संतानोत्पत्ति का विचार होता है। लग्नस्थ पाप ग्रह शरीर को रोगी करते हैं। वे शरीर के लिए कष्टकारक होते हैं। अष्टम भाव पति/पत्नी का मारक स्थान है। इस स्थान में पाप ग्रहों का होना आयु के लिए हानिकारक है।

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Pandit Kaushal Pandey

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