मंगलवार, 21 अक्टूबर 2014

दीपावली के दिन किये जाने वाले प्रयोग - पंडित कौशल पाण्डेय +919968550003

दीपावली के दिन किये जाने वाले प्रयोग - पंडित कौशल पाण्डेय +919968550003 



दीपावली पर प्राप्त करे सिद्ध ‘श्री यंत्र’, बीसा यन्त्र और हत्था जोड़ी @ 2100 दीपावली के पावन पर अनेक प्रकार के यन्त्र और तंत्र सिद्ध किये जाते है जैसे लक्ष्मी यन्त्र , बीसा यन्त्र , श्री यन्त्र , कुबेर यन्त्र , सियार सिंगी , हत्था जोड़ी, शंख , जुड़वाँ छुहारा , एकाक्षी नारियल , गोमती चक्र आदि की विधिवत पूजा और मंत्र जाप से आप भी अपने मनोरथ सिद्ध कर सकते है , ऋद्धि-सिद्धि के स्वामी गणेश और धन की देवी लक्ष्मी हैं। इन दोनों का संयुक्त यंत्र श्री यंत्र कहलाता है। इस दिन इस यंत्र की स्थापना से घर में धन-संपत्ति की कमी नहीं रहती है। दीपावली पर फैक्टरी , दुकान आदि में ‘श्री यंत्र’, और ‘कुबेर यंत्र’ की विधिवत स्थापना करने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है,

 लक्ष्मी पूजन का समय स्थिर लग्न में निर्धारित किया जाता है। 
वृष, सिंह, वृश्चिक और कुंभ ये चार स्थिर लग्न हैं। 
दीपावली के समय रात्रि में वृष और सिंह लग्न पड़ता है वृष लग्न संध्या के कुछ उपरांत पड़ता है एवं सिंह लग्न मध्यरात्रि के आस-पास। वृष की अपेक्षा सिंह अधिक प्रभावशाली लग्न है। लेकिन अष्टम और द्वादश भावों की शुद्धि पर ध्यान देना चाहिए अर्थात ग्रहों की स्थिति के अनुसार अष्टम या द्वादश भाव में कोई पापी ग्रह स्थित न रहे। वही लग्न अपेक्षाकृत अधिक उपयुक्त माना जाता है। 
 यदि दोनों लग्न शुद्ध हो तो किसी भी व्यक्ति को सिंह लग्न में लक्ष्मी की पूजा करनी चािहए। यदि वृष लग्न शुद्ध हो एवं सिंह लग्न अशुद्ध, तो वृष लग्न में ही लक्ष्मी पूजन करना ठीक होता है। यदि दोनों लग्न अशुद्ध हों, तो सिंह लग्न में पूजा करनी चाहिए। अधिकांश व्यापारीगण दीपावली की रात्रि में सिंह लग्न के अंतर्गत ही लक्ष्मी पूजा किया करते हैं। वैदिक काल से लेकर वर्तमान काल तक लक्ष्मी का स्वरूप अत्यंत व्यापक रहा है। ऋग्वेद की ऋचाओं में ‘श्री’ का वर्णन समृद्धि एवं सौंदर्य के रूप में अनेक बार हुआ है। 

अथर्ववेद में ऋषि, पृथ्वी सूक्त में ‘श्री’ की प्रार्थना करते हुए कहते हैं ‘‘श्रिया मां धेहि’’ अर्थात मुझे ‘‘श्री’’ की संप्राप्ति हो। श्री सूक्त में ‘श्री’ का आवाहन जातवेदस के साथ हुआ है। 

‘जातवेदोमआवह’ जातवेदस अग्नि का नाम है। अग्नि की तेजस्विता तथा श्री की तेजस्विता में भी साम्य है। विष्णु पुराण में लक्ष्मी की अभिव्यक्ति दो रूपों में की गई दीपावली का सामान्य परिचय लक्ष्मी पूजा के उत्सव के रूप में है। समुद्र मंथन के समय 14 रत्न निकले थे, 

जिनमें पहले रत्न लक्ष्मी अर्थात् ‘श्री’ के प्रकट होने की अंतर्कथा वाला प्रसंग दीपावली का प्रमुख संदर्भ है। पौराणिक महत्व के साथ यह एक व्यावहारिक सच्चाई भी है कि लक्ष्मी की प्रसन्नता सभी के लिए अभीष्ट है। धन वैभव हर किसी को चाहिए। इसलिए उसी अधिष्ठात्री शक्ति की पूजा-आराधना के लिए दीपावली का महापर्व व्यापक रूप से प्रचलित है। दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजन , श्री सूक्त का पाठ और कमलगट्टे की माला से निम्न मंत्र का जाप और हवन करने से लक्ष्मी जी की कृपा प्राप्त होगे , 

निम्न मंत्रो की 11 माला करे इसके पश्चात किसी 108 बार निम्न मंत्र बोलकर हवन करना चाहिए मंत्र: ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद-प्रसीद ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः मंत्र: ऊँ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्नीं च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्।। मंत्र: ऊँ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौं ऊँ ह्रीं क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं सकल ह्रीं सौं ऐं क्लीं ह्रीं श्री ऊँ मंत्र: ऊँ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः मंत्र: ऊँ श्रीं श्रियै नमः दीपावली की अर्द्ध रात्रि में 11 माला ‘‘ऊँ ऐं ह्रीं कलीं चामुण्डायै विच्चे’ का जप करने से सुख-समृद्धि बढ़ती है। जानिए कुछ अनुभूत प्रयोग 
 * दीपावली की सुबह को गन्ने की जड़ को लाकर रात्रि को लक्ष्मी पूजन में इसकी भी पूजा करने से धन लाभ मिलता है। 
* दीपावली के शुभ मुहूर्त से प्रारम्भ करके प्रत्येक अमावस्या को किसी अपंग या विकलांग भिखारी को भोजन कराएं। धन-समृद्धि में सर्वदा ’वृद्धि होती रहेगी। 
 * दीपावली के दिन पति-पत्नी सुबह विष्णु मंदिर में एक साथ जाएं और वहां लक्ष्मी को वस्त्र चढ़ाएं, धन की कमी नहीं रहेगी। लक्ष्मी पूजन के समय लक्ष्मी को कमल अर्पित करें और कमल गट्टे की माला से जाप करें, लक्ष्मी अधिक प्रसन्न होती है। 
* दीपावली वाले दिन दोपहर के समय पीपल के पेड़ की छाया में खड़े होकर चीनी, दूध और घी मिलाकर उसे उस वृक्ष की जड़ में डालंे, अभूतपूर्व आर्थिक समृद्धि होगी। यदि आप का पैसा कहीं फंस गया है तो दीपावली के दिन प्रातःकाल जल में लाल मिर्च के 21 बीज डालकर सूर्य को अर्पित करें। आप का फंसा हुआ पैसा निकल आयेगा। 
* दीपावली के दिन बहेड़ा वृक्ष के फल की पूजा कर के लाल वस्त्र में रखने से धन की वृद्धि होती है। 
* सिंदूर, सात कौड़ी, कमल के फूल व श्री यंत्र को किसी चाँदी के पात्र में रख कर दीपावली की रात्रि में अपने धन स्थान पर प्रतिष्ठापित करें, आर्थिक उन्नति की निरंतरता सर्वदा बनी रहेगी। 
* दीपावली के शुभ मुहूर्त में साबुत नारियल को चमकीले लाल रंग के कपड़े में लपेटकर अपने धन-स्थान पर प्रतिष्ठापित करें। आर्थिक समृद्धि सर्वदा बनी रहेगी। 
* दीपावली के दिन गोधूलि काल में तुलसी के पौधे को जल अर्पित करने के पश्चात् उसके समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित करें तथा इस प्रक्रिया को सात शुक्रवार तक दोहराएं। इस दौरान धूप, अगरबत्ती आदि का प्रयोग अवश्य करें, धन-समृद्धि की वृद्धि का क्रम सर्वदा चलता रहेगा। 
* दीपावली के शुभ मुहूर्त में तीन पीली कौड़ी, तीन कमलगट्टे व एक साबुत सुपारी को लाल रंग के कपड़े में लपेट कर तिजोरी या धन-स्थान पर स्थापित करें तथा प्रत्येक शुक्रवार को इसे धूप व अगरबत्ती दिखाया करें। ख़ज़्ााना सर्वदा भरा रहेगा। 
* कर्ज से मुक्तिः- दीपावली की रात्रि में अशोक के वृक्ष के समक्ष गायं के घी का दीपक प्रज्वलित करें तथा इस प्रक्रिया को नित्य सात रात्रि तक दोहराते रहें। शीघ्र ही कर्ज से मुक्ति मिलने लगेगी। 
* दीपावली के शुभ मुहूर्त में कौड़ी व हरसिंगार की जड़ को पीले कपड़े में लपेटकर ताबीज स्वरूप गले या अपनी दाहिनी भुजा में धारण करें। शीध्र ही कर्ज उतरने लगेगा। 
* पारिवारिक-समृद्धिः- दीपावली की रात्रि में परिवार के सभी सदस्यों के सिर के ऊपर से काले तिल को सात बार उतार कर घर की पश्चिम दिशा की ओर फेंक दें। ऐसा करने से पारिवारिक सुख पर आने वाली कोई भी नकारात्मक बला शीध्र ही उतर जाती है। 
* दीपावली की शाम पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल के दीपक को प्रज्वलित करें तथा इस प्रक्रिया को नियमित रूप से प्रत्येक शनिवार को दोहराते रहें। ऐसा करना पारिवारिक समृद्धि के लिए अत्यंत लाभप्रद होता है। 
* दीपावली की रात्रि घर के प्रत्येक कमरे में शंख व डमरू बजाएं, घर में व्याप्त कोई भी नकारात्मक ऊर्जा शीघ्र ही समाप्त हो जाएगी। दीपावली पूजन के बाद शंख और डमरू बजाने से दरिद्रता जाती है और लक्ष्मी आती है। 
* शत्रु से सुरक्षाः- दीपावली की रात्रि एक मुट्ठी उड़द के दानों पर शत्रु के नाम का मनन करके उन्हंे किसी निर्जन स्थान पर दबा दें तथा उस के ऊपर नींबू निचोड़ दें। शत्रु का क्रोध समाप्त हो जाएगा। 
* दीपावली की रात्रि एक मुट्ठी शक्कर व तिल मिश्रित करें तथा शत्रु के नाम का मनन कर के उसे किसी निर्जन स्थान पर दबा दें। शत्रु के हृदय में आप के प्रति करूणा उत्पन्न होने लगेगी। 
* दीपावली की रात्रि एक साबुत नींबू के ऊपर शत्रु का नाम लिखकर किसी बहते दरिया में प्रवाहित कर दें। शत्रु के हृदय में मित्रता के भाव उत्पन्न होने लगेगें। दीपावली के शुभ मुहूर्त में पीपल की जड़ को अभिमंत्रित करें तथा उसे चांदी के ताबीज़्ा में डाल कर गले में धारण करें। आपसी शत्रुता प्रेम में बदलने लगेगी।

शुभ मुहूर्त में करे दीपावली पूजन :- पंडित कौशल पाण्डेय 09968550003

शुभ मुहूर्त में करे दीपावली पूजन :- पंडित कौशल पाण्डेय 09968550003 कार्तिक कृष्ण अमावश्या दिन गुरुवार को श्री महालक्ष्मी पूजन किया जायेगा , इस बार दीपावली में विशेष संयोग बन रहा है, जो राज्य व देश के लिए उत्तम है. गुरुवार को शाम चार बजे चंद्रमा तुला राशि में प्रवेश कर रहा है. साथ ही तुला राशि में सूर्य, चंद्र, शुक्र व शनि चार ग्रहों की युति हो रही है. शनि उच्च राशि का और सूर्य नीच राशि का है. हालांकि उच्च ग्रह के साथ नीच ग्रह की युति भी फलदायक होती है. इससे शनि के साथ सूर्य भी उत्तम फल देनेवाला है. दीपावली में अमावस्या तिथि, प्रदोष काल, शुभ लग्न व चौघडि़या मुहूर्त का विशेष महत्व है. इस दिन सूर्यास्त 5.37 बजे होगा. इस अवधि से लेकर 8.14 बजे तक प्रदोष कल रहेगा. इस समय दीपावली पूजन करना अति उत्तम रहेगा. साथ ही प्रदोष काल के स्थिर लग्न में पूजन करना उत्तम है. जो शाम 6.41 बजे से 8.37 बजे तक रहेगा. इस समय प्रदोष काल व स्थिर लग्न के साथ होने से पूजा करना शुभ फलदायी है. इस दिन अमावश्या तिधि मध्यरात्रि उपरांत 3 बजकर 26 मिनट तक रहेगी , चित्रा नक्षत्र रात्रि 4 बजकर 2 मिनट तक रहेगा , गुरुवार को चित्रा से बना चर योग सर्वसिद्धिदायक रहेगा। आज के दिन राहुकाल दिन में 1:30 pm से 3pm बजे तक रहेगा *शुभ मुहूर्त में करे दीपावली पूजन* इस दिन गृहस्थ और व्यापारी दोनों वर्गों के लोग पूजा करते हैं. व्यापारी इस दिन बही-खाता बदलते हैं, वहीं, गृहस्थ प्रदोष काल में महालक्ष्मी की पूजा कर सुख समृद्धि की कामना करते हैं. शास्त्रों के अनुसार दीपावली में गोधूलि लग्न से आरंभ होनेवाली पूजा महानिशिथ काल अर्थात अर्धरात्रि तक की जाती है. ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार स्थिर लग्न में वृष , सिंह, वृश्चिक, कुम्भ ये चार लग्न पूजा के लिए सर्वोत्तम समय माना गया है. गुरुवार के दिन अमावश्या होने के कारण आज धनु लग्न में पूजा करना व्यापारी वर्ग के लिए शुभ है क्योंकी धनु राशि का स्वामी गुरु को माना गया है धनु लग्न 10:37 से 12:41 तक है मीन लग्न 15:45 से 17:21 तक है चर का चौघड़िया भी 10:41 से शुरू होगा जो पूजा और हवन के लिए शुभ समय है मकर लग्न 12:41 से 14:25 तक रहेगा, जिसमे लाभ अमृत का चौघड़िया श्रेष्ठा तो राहुकाल नष्ट रहेगा लग्नेश शनि कर्म और कार्य क्षेत्र में बढ़ोत्तरी करेगा साथ ही लग्न पर उच्च गुरु का प्रभाव और भी शुभ है कुम्भ लग्न 14:25 से 15:54 तक रहेगा साथ ही दोपहर 3 बजे राहु काल समाप्त हो जायेगा घर में दीपावली पूजन और रात्रि के लग्न मुहूर्त ---- दीपावली की रात्रि बेला में अमृत, चर , रोग, काल, लाभ , उद्वेग , शुभ और अमृत के 8 चौघड़िया मुहूर्त आयेगे सायंकाल 17:40 से अमृत का चौघड़िया शुरू होगा 19:15 से चर का चौघड़िया ,20:52 से रोग का और 22:28 से काल का , 24:4 से लाभ का चौघड़िया शुरू होगा जो की रात्रि 1 बजकर 47 मिनट तक रहेगा मेष लग्न सायं 17:21 से प्रारम्भ वृष लग्न रात्रि 18:58 से चर का चौघड़िया और वृष राशि दोनों का स्वामी शुक्र है , इस लग्न में पूजा करना और भी शुभ है मिथुन लग्न रात्रि 20:55 से प्रारम्भ होकर 23:9 तक रहेगा लग्नेश बुध राहु से ग्रसित है साथ ही रोग का चौघड़िया 20:52 से शुरू होगा जो उतना शुभ नहीं होता है , इसके लिए पहले बुध का पूजन कराकर दीपावली का पूजन करने से शुभ परिणाम मिलेंगे कर्क लग्न 23:09 से प्रारम्भ होकर रात्रि 01:28 रहेगा , इस समय माँ लक्ष्मी का समुद्र से पादुर्भाव हुआ था जी निशिथकाल माना गया है इस समय घर में माँ लक्ष्मी का पूजन और हवन करने से माँ लक्ष्मी का भंडार हमेशा भरा रहता है इस वर्ष प्रदोष काल सूर्यास्त के 6 घटी अर्थात रात्रि 20: 4 तक महालक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है. उसके बाद तांत्रिक जगत व मंत्र सिद्धि के लिए सिंह लग्न में पूजा करना उत्तम माना गया है, जो अर्धरात्रि 1.28 बजे से प्रारम्भ होगा दीपावली के इस पर्व पर प्रकाश की प्रत्येक किरण आपके जीवन में स्वास्थ्य, सुख, समृद्धि और खुशियों की स्वर्णिम सौगात व सन्देश लाये, यही मेरी शुभ कामना ... मंगलकामनाओं सहित दीपावली के पावन पर्व की आपको सपरिवार बधाई व हार्दिक शुभकामनाएँ. पंडित कौशल पाण्डेय 09968550003

बुधवार, 10 जुलाई 2013

इन सरल प्रयोगों को अपने जीवन में अपनाकर करे नई उर्जा का संचार – कौशल पाण्डेय

इन सरल प्रयोगों को अपने जीवन में अपनाकर करे नई उर्जा का संचार – कौशल पाण्डेय 



 यदि आप अपने जीवन में कुछ परिवर्तन करना चाहते है तो ऐसा नियमित रूप से करेगे तो इससे आप का भाग् य और समय धीरे धीरे परिवर्तन होने लगेगा ....

कार्तिक महिना का पावन पर्व चल रहा है इस महीने में ब्रह्म बेला में उठ कर इश्वर का नाम , ध्यान , योग और पूजा करने से अकस्मात् लाभ होता है 

 1. सूर्योदय से पूर्व ब्रह्मा बेला में उठे , और अपने दोनों हांथो की हंथेली को रगरे और हंथेली को देख कर अपने मुंह पर फेरे, क्योंकि :- 
शास्त्रों में कहा गया है की कराग्रे वसते लक्ष्मी, करमध्ये सरस्वती ।
 करमूले स्थिता गौरी, मंगलं करदर्शनम् ॥ 

हमारे हाथ के अग्र भाग में लक्ष्मी, तथा हाथ के मूल मे सरस्वती का वास है अर्थात भगवान ने हमारे हाथों में इतनी ताकत दे रखी है, ज़िसके बल पर हम धन अर्थात लक्ष्मी अर्जित करतें हैं। जिसके बल पर हम विद्या सरस्वती प्राप्त करतें हैं।इतना ही नहीं सरस्वती तथा लक्ष्मी जो हम अर्जित करते हैं, उनका समन्वय स्थापित करने के लिए प्रभू स्वयं हाथ के मध्य में बैठे हैं। ऐसे में क्यों न सुबह अपनें हाथ के दर्शन कर प्रभू की दी हुई ताकत का अहसास करते हुए तथा प्रभू के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए दिन की अच्छी शुरूवात करें। 

 2.मल , मूत्र , दातुन (मंजन) , भोजन करते समय मौन ( शांत ) रहे 

3- . योग और प्राणायाम को नियमित जीवनचर्या में शामिल करे ,ऐसा करने से शरीर हमेशा निरोग रहता है, 

4. . प्रातः अपने माता पिता गुरुजनों और अपने से बड़ों का आशीर्वाद ले , ऋषियों ने कहा है की जो भी माता बहन या भाई बंधू अपने घरों में रोज अपने से बड़ो या पति , सास -ससुर का रोज आशीर्वाद लेते है उनके घर में कभी अशांति नहीं आती है या कभी भी तलाक या महामरी नहीं हो टी है इशलिये अपने से बड़ो की इज्जत करें और उनका आशीर्वाद लें . 
5 तिलक किये बिना और अपने सर को बिना ढके पूजा पाठ और पित्रकर्म या कोई भी शुभ कार्य न करें, जहाँ तक हो सके तिलक जरुर करें, 
6. रोज नहा धोकर अपने शारीर को स्वक्ष करें , साफ वस्त्र पहने , गुरु और इश्वर का चिंतन करते हुए अपने काम को इश्वर की सेवा करते हुए करें, कुछ भी खाने पिने से पहले गाय, कुत्ता और कौवा का भोजन जरुर निकले, इश्को करने से आप के घर में अन्ना का भंडार हमेशा भरा रहेगा. 

7.सोते समय अपना सिरहाना (सर ) पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर रखने से धन व आयु की बढ़ोत्तरी होती है।उत्तर की ओर सिरहाना रखने से आयु की हानि होतीहै 

8. कभी भी बीम या शहतीर के नीचे न बैठें और न ही सोयें । इससे देह पीड़ा या सिर दर्द होता है । 

9. अपने घर में तुलशी का पौधा लगायें , 

10-घर में पोछा लगाते समय पानी में नमक या सेंधा नमक डाल लें । घर में झाडू व पोंछा खुले स्थान पर न रखें । 11-घर में टूटे-फूटे बतरन, टूटा दर्पण ( शीशा ), टूटी चारपाई या बैड न रखें । इनमें दरिद्रता का वास होता है। 

12-यदि घर में कोइ घडी ठीक से नहीं चल रही हैं तो उन्हें ठीक करा लें ।बंद घड़ी गृहस्वामी के भाग्य को कम करती है । 

13-पूर्व की ओर मुंह करके भोजन करने से आयु, दक्षिण की ओर मुंह करके भोजन करने से प्रेत, पश्‍चिम की ओर मुंह करके भोजन करने से रोग व उत्तर की ओर मुंह करके भोजन करने से धन व आयु की प्राप्ति होती है । 

14- परोपकार का पालन करें, असहाय , गरीब और पशुओं और पर्यावरण की रक्षा करें 
15- अपने धर्मं की रक्षा करें, मानव समाज की रक्षा करें, अपने देश और जन्मभूमि की रक्षा करें , 
16-मन वाणी और कर्म से सदाचार का पालन करें . 
17- प्यार ही जीवन है खुद भी जियो और दूसरों को भी जीने दो ,

सोमवती अमावश्या ..:- कौशल पाण्डेय 09968550003

सोमवती अमावश्या :- कौशल पाण्डेय 09968550003 कालसर्प योग की शांति के वैदिक उपाय ( Vedic Remedies of Kalsarp Yoga ) सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावश्या को सोमवती अमावश्या के नाम से जाना जाता है, आज के दिन पित्र दोष , काल सर्प दोष की शांति के लिए बहुत ही शुभ दिन है ,काल शर्प वैसे देखा जाय तो शर्प योनी के बारे में अनेक वर्णन मिलते है हमारे धर्म शास्त्रों में गीता में स्वयं भगवान् श्री कृष्ण ने कहा है की पृथ्वी पर मनुष्य का जन्म केवल विषय -वासना के कारण जीव की उत्त्पत्ति होती है | जीव रुपी मनुष्य जैसा कर्म करता है उसी के अनुरूप फल मिलता है. विषय -वासना के कारन ही काम-क्रोध, मद-लोभ और अहंकार का जन्म होता है इन विकारों को भोगने के कारण ही जीव को “सर्प “योनी प्राप्त होती है | कर्मों के फलस्वरूप आने वाली पीढ़ियों पर पड़ने वाले अशुभ प्रभाव को काल शर्प दोष कहा जाता है। कुंडली में जब सारे ग्रह राहू और केतु के बीच में आ जाते है तब कालसर्प योग बनता है ज्योतिष में इस योग को अशुभ मन गया है लेकिन कभी कभी यह योग शुभ फल भी देता है, ज्योतिष में राहू को काल तथा केतु को सर्प माना गया है राहू को सर्प का मुख तथा केतु को सर्प का पूंछ कहा गया है वैदिक ज्योतिष में राहू और केतु को छाया ग्रह संज्ञा दी गई है, राहू का जन्म भरणी नक्षत्र में तथा केतु का जन्म अश्लेषा में हुआ है जिसके देवता “काल “एवं “सूर्य “है | राहू को शनि का रूप और केतु को मंगल ग्रह का रूप कहा गया है ,राहु मिथुन राशि में उच्च तथा धनु राशि में नीच होता है,राहु के नक्षत्र आर्द्रा स्वाति और शतभिषा है, राहु प्रथम द्वितीय चतुर्थ पंचम सप्तम अष्टम नवम द्वादस भावों में किसी भी राशि का विशेषकर नीच का बैठा हो,तो निश्चित ही आर्थिक मानसिक भौतिक पीडायें अपनी महादशा अन्तरदशा में देता है मनुष्य को अपने पूर्व दुष्कर्मो के फलस्वरूप यह दोष लगता है जैसे शर्प को मारना या मरवाना , भ्रूण हत्या करना या करवाने वाले को , अकाल मृत्यु ( किसी बीमारी या दुर्घटना में होने करण ) उसके जन्म जन्मान्तर के पापकर्म के अनुसार ही यह दोष पीढ़ी दर पीढ़ी चला आता है सोमवती अमावस्या के दिन मौन रहने का सर्वश्रेष्ठ फलकहा गया है. देव ऋषि व्यास के अनुसार इस तिथि में मौन रहकर स्नान-ध्यान करने से सहस्त्र गौ दान के समान पुन्य फल प्राप्त होताहै. अगर आप की कुंडली में पित्रदोश या काल शार्प दोष है तो आप किसी विद्वान पंडित से इसका उपाय जरुर कराएँ.. सुप्रसिद्ध बारह ज्योतिलिंगोंमें से एक स्थान त्रयंबकेश्वर में यहां यह विधि विधान प्राचीनकाल से होता आया है। त्रयंबकेश्वर महाश्मशान है। गोदावरी नदी का पवित्रस्थान है। यहां के लोगों को इस विधिका संपूर्ण ज्ञान है इसके आलावा प्रयाग, भीमाशंकर, काशी आदि शिवसंबंधी समस्त तीर्थों में की जाती है अगर समय का आभाव है तो किसी भी शिव मंदिर में सोमवती अमावश्या या नाग पंचमी के दिन ही काल शर्प दोष की शांति करनी चाहिए काल के स्वामी महादेव शिव जी है सिर्फ शिव जी है जो इस योग से मुक्ति दिला सकते है क्योंकि नाग जाति के गुरु महादेव शिव हैं। , शास्त्रो में जो उपाय बताए गये हैं उनके अनुसार जातक किसी भी मंत्र का जप करना चाहे, तो निम्न मंत्रों में से किसी भी मंत्र का जप-पाठ आदि कर सकता है। १- ऊँ नम शिवाय मंत्र का 108 बार जप करना चाहिए और शिवलिंग के उपर गंगा जल, कला तिल चढ़ाये । २ – महामृत्युंजय मत्र : ॐ हौं ॐ जूं˙ सः ॐ भूः ॐ भुवः ॐ स्वः ॐ त्र्यंवकंयजामहे सुगंधि पुष्टि वर्धनम् उर्वारुकमिव वन्धनाम् मृर्त्योमुक्षीय मामृतात्॥ ॐ स्वः ॐ भुवः ॐ भूः सः ॐ जूं ॐ हौं ॐ ॥ ३- राहु मंत्र : ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः और केतु मंत्र : ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः। ४- नव नाग स्तुति : अनंतं वासुकिं शेषंपद्म नाभं च कम्बलं।शंख पालं धृत राष्ट्रं तक्षकं कालियंतथा॥ एतानि नव नामानि नागानां चमहात्मनां।सायं काले पठेन्नित्यं प्रातः कालेविशेषतः॥तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयीभवेत्॥ सोमवती अमावश्या या नाग पंचमी के दिन रूद्राभिषेक कराना चाहिए. नाग के जोड़े चांदी या सोने में बनवाकर उन्हें बहते पानी में प्रवाहित कर दें। सोमवती अमावस्या को दूध की खीर बना, पितरों को अर्पित करने से भी इस दोष में कमी होती है . या फिर प्रत्येक अमावस्या को एक ब्राह्मण को भोजन कराने व दक्षिणा वस्त्र भेंट करने से पितृ दोष कम होता है . शनिवार के दिन पीपल की जड़ में गंगा जल, कला तिल चढ़ाये । पीपल और बरगद के वृ्क्ष की पूजा करने से पितृ दोष की शान्ति होती है नागपंचमी के दिन व्रत रखकर नाग देव की पूजा करनी चाहिए. कालसर्प गायत्री मंत्र का जप करना चाहिए. ॐ काल शर्पेभ्यो नमः… अगर कोए इस मंत्र को बोल कर कच्चे दूध को गंगाजल में मिलाकर उसमे काला तिल डाले और बरगद के पेड़ में दूध की धारा बनाकर ११ बार परिक्रमम करें , या शिवलिंग पर ॐ नमः शिवाय बोलकर चढ़ाये तो शार्प दोष से मुक्ति मिलेगी… इन उपायों से कालसर्प के अनिष्टकारी प्रभाव में कमी आती है,दोष की शांति करने के लिए संपर्क करे :- कौशल पाण्डेय

अंक ज्योतिष :- पंडित कौशल पाण्डेय +919968550003

अंक ज्योतिष :- पंडित कौशल पाण्डेय +919968550003 



#अंक ज्योतिष :- पंडित कौशल पाण्डेय +919968550003 

जानिए अंक ज्योतिष के माध्यम से अपने मूलांक और शुभ अंक 

अंक ज्योतिष के अनुसार जन्म तारीख के कुल योग को मूलांक कहते है , DD :MM :YYYY के कुल योग को भाग्यांक कहते है, मूलांक और भाग्यांक के अनुसार काम करने से जीवन में रुके हुए काम पुरे होते चले जाते है :- अंकज्योतिष में नौ ग्रहों सूर्य, चन्द्र, गुरू, यूरेनस, बुध, शुक्र, वरूण, शनि और मंगल की विशेषताओं के आधार पर गणना की जाती है।

इन में से प्रत्येक ग्रह के लिए 1 से लेकर 9 तक कोई एक अंक निर्धारित किया गया है, कौन से ग्रह पर किस अंक का असर होता है। ये नौ ग्रह मानव जीवन पर गहरा प्रभाव डालते हैं। 

आइये जाने किस अंक का कौन स्वामी है :- 
जन्म तारीख 1, 10, 19, 28 का मूलांक 1 का स्वामी सूर्य है 
2, 11, 20, 29 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक- 2 स्वामी चंद्रमा
 3, 12, 21, 30 मूलांक- 3, स्वामी गुरू
 4, 13, 22, 31 मूलांक 4 का स्वामी- राहु 
5, 14, 23 मूलांक 5 स्वामी बुध 
6, 15, 24 मूलांक 6 स्वामी शुक्र 
7, 16, 25 मूलांक 7 स्वामी केतु 
8, 17, 26 मूलांक 8 स्वामी- शनि- 
9, 18, 27 मूलांक 9 स्वामी मंगल 

आइये जाने भाग्यशाली अंक, अंको के रंग और शुभ दिशा मूलांक 
1 : यह अंक स्वतंत्र व्यक्तित्व का धनी है। इससे संभावित अंह का बोध, आत्म निर्भरता, प्रतिज्ञा, दृढ़ इच्छा शक्ति एवं विशिष्ट व्यक्तित्व दृष्टि गोचर होता है। इसके स्वामी सूर्य हैं. जिस व्यक्ति का जन्म समय 21 जुलाई से 28 अगस्त के मध्य हो, का प्रभाव सूर्य के नियंत्रण में होता है, 

इनके लिए शुभ तिथि 1,10,19 एवं 28 तारीख है. चार अंक से इनका जबरदस्त आकर्षण होता है. इनके लिए शुभ दिन रविवार एवं सोमवार है, तो शुभ रंग पीला, हरा एवं भूरा है. ये अपने ऑफिस, शयनकक्ष परदे, बेडशीट एवं दीवारों के रंग इन्हीं रंगों में करें, तो भाग्य पूर्णत: साथ देता है. इस मूलांक के व्यक्ति शासन के शीर्ष पद पर देखे जाते हैं. छह एवं आठ अंक वाले इनके शत्रु हैं. इनकी शुभ दिशा ईशान कोण है. 

मूलांक 2 : अंक दो का संबंध मन से है। यह मानसिक आकर्षण, हृदय की भावना, सहानुभूति, संदेह, घृणा एवं दुविधा दर्शाता है। इसका प्रतिनिधित्व चन्द्र को मिला है, इस अंक का स्वामी चंद्रमा है 2,11, 20, 29 तारीख अति शुभ हैं. रविवार, सोमवार एवं शुक्रवार श्रेष्ठ दिन हैं. सफेद एवं हल्का हरा इनके शुभ रंग हैं.

 मूलांक 3 : इस अंक के स्वामी देव गुरु वृहस्पति हैं .इससे बढ़ोत्तरी, बुद्धि विकास क्षमता, धन वृद्धि एवं सफलता मिलती है। 3, 12, 21 एवं 30 तारीख इनके लिए विशेष शुभ हैं. मंगलवार, गुरुवार एवं शुक्रवार श्रेष्ठ है. पीला एवं गुलाबी रंग अतिशुभ है. शुभ माह जनवरी एवं जुलाई है. दक्षिण, पश्चिम एवं अग्नि कोण श्रेष्ठ दिशा है. 

मूलांक 4 : इस अंक से मनुष्य की हैसियत, भौतिक सुख संपदा, सम्पत्ति, कब्जा, उपलब्धि एवं श्रेय प्राप्त होता है। इसका प्रतिनिधि हर्षल और राहु हैं. 2, 11, 20 एवं 29 तारीख शुभ है. रविवार, सोमवार एवं शनिवार श्रेष्ठ दिन हैं, जिसमें शनिवार सर्वश्रेष्ठ है. नीला एवं भूरा रंग शुभ है. 

मूलांक 5 : इस अंक का स्वामी बुध है. शुभ तिथि 5, 14 एवं 23 है. सोमवार, बुधवार एवं शुक्रवार श्रेष्ठ है. उसमें शुक्रवार सर्वाधिक शुभ है. सफेद, खाकी एवं हल्का हरा रंग इनके लिए शुभ है. इनके लिए अशुभ अंक 2, 6 और 9 है. 

मूलांक 6 : इस अंक का स्वामी शुक्र है. छह का अंक वैवाहिक जीवन, प्रेम एवं प्रेम-विवाह, आपसी संबंध, सहयोग, सहानुभूति, संगीत, कला, अभिनय एवं नृत्य का परिचायक है।शुभ तिथि माह की 6,15 एवं 24 तारीख है. मंगलवार, गुरुवार एवं शुक्रवार श्रेष्ठ दिन है जिसमें शुक्रवार सर्वश्रेष्ठ है. आसमानी, हल्का एवं गहरा नीला एवं गुलाबी रंग शुभ हैं. लाल एवं काले रंग का प्रयोग वर्जित है. 

मूलांक 7 : इस अंक का स्वामी केतु है. सात का अंक आपसी ताल मेल, साझेदारी, समझौता, अनुबंध, शान्ति, आपसी सामंजस्य एवं कटुता को जन्म देता है।महीना के 7, 16 एवं 25 तारीख सर्वश्रेष्ठ है. 21 जून से 25 जुलाई तक का समय भी श्रेष्ठ है. रविवार, सोमवार एवं बुधवार श्रेष्ठ हैं. जिसमें सोमवार सर्वश्रेष्ठ है. शुभ रंग हरा, सफेद एवं हल्का पीला है. 

मूलांक 8 : इस अंक का स्वामी शनि हैं. 8, 17 एवं 26 तारीख श्रेष्ठ तिथि हैं.शनि का अंक होने से इस अंक से क्षीणता, शारीरिक मानसिक एवं आर्थिक कमजोरी, क्षति, हानि, पूर्ननिर्माण, मृत्यु, दुःख, लुप्त हो जाना या बहिर्गमन हो जाता है, रविवार, सोमवार एवं शनिवार शुभ हैं. जिसमें शनिवार सर्वाधिक शुभ है. भूरा, गहरा नीला, बैगनी, सफेद एवं काला शुभ रंग है. हृदय एवं वायु रोग इनके प्रभाव क्षेत्र हैं. दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम एवं दक्षिण-पूर्व दिशा शुभ हैं. 

मूलांक 9 : अंक नौ का स्वामी मंगल है. इस मूलांक के लोगों पर मंगल ग्रह का प्रभाव सर्वाधिक है.यह अन्तिम ईकाई अंक होने से संघर्ष, युद्ध, क्रोध, ऊर्जा, साहस एवं तीव्रता देता है। इससे विभक्ति, रोष एवं उत्सुकता प्रकट होती है। इसका प्रतिनिधि मंगल ग्रह है जो युद्ध का देवता है 9, 18 एवं 27 श्रेष्ठ तारीख है. मंगलवार, गुरुवार एवं शुक्रवार शुभ दिन है. गहरा लाल एवं गुलाबी शुभ रंग है. पूर्व, उत्तर-पूर्व एवं उत्तर-पश्चिम दिशा अतिशुभ हैं. हनुमान जी की अराधना श्रेष्ठ है.

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पंडित कौशल पाण्डेय
श्री राम हर्षण शांति कुञ्ज , दिल्ली
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कुन्जिका स्तोत्रं :- पंडित कौशल पाण्डेय +919968550003


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श्री दुर्गा सप्तसती में वर्णित अत्यंत प्रभावशली सिद्धि कुन्जिका स्त्रोत्र प्रस्तुत कर रहा हूँ इस सिद्धि कुन्जिका स्त्रोत्र का नित्य पाठ करने से संपूर्ण श्री दुर्गा सप्तशती पाठ का फल मिलता है .. 
यह महामंत्र देवताओं को भी दुर्लभ नहीं है , इस मंत्र का नित्य पाठ करने से माँ भगवती जगदम्बा की कृपा बनी रहती है ..
 कुन्जिका स्तोत्रं शिव उवाच 
शृणु देवि प्रवक्ष्यामि कुंजिकास्तोत्रमुत्तमम्‌। येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः भवेत्‌॥1॥ 
न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम्‌। न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम्‌॥2॥ 
कुंजिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत्‌। अति गुह्यतरं देवि देवानामपि दुर्लभम्‌॥ 3॥ 
गोपनीयं प्रयत्नेन स्वयोनिरिव पार्वति। मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनोच्चाटनादिकम्‌।
 पाठमात्रेण संसिद्ध्‌येत् कुंजिकास्तोत्रमुत्तमम्‌ ॥4॥ 

अथ मंत्र ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ॐ ग्लौ हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा ॥ इति मंत्रः॥ 

नमस्ते रुद्ररूपिण्यै नमस्ते मधुमर्दिनि। नमः कैटभहारिण्यै नमस्ते महिषार्दिन ॥1॥
नमस्ते शुम्भहन्त्र्यै च निशुम्भासुरघातिन ॥2॥ 
जाग्रतं हि महादेवि जपं सिद्धं कुरुष्व मे। ऐंकारी सृष्टिरूपायै ह्रींकारी प्रतिपालिका॥3॥ 
क्लींकारी कामरूपिण्यै बीजरूपे नमोऽस्तु ते। चामुण्डा चण्डघाती च यैकारी वरदायिनी॥ 4॥
 विच्चे चाभयदा नित्यं नमस्ते मंत्ररूपिण ॥5॥ 
धां धीं धू धूर्जटेः पत्नी वां वीं वूं वागधीश्वरी। क्रां क्रीं क्रूं कालिका देवि शां शीं शूं मे शुभं कुरु॥6॥
 हुं हु हुंकाररूपिण्यै जं जं जं जम्भनादिनी। भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रे भवान्यै ते नमो नमः॥7॥ 
अं कं चं टं तं पं यं शं वीं दुं ऐं वीं हं क्षं धिजाग्रं धिजाग्रं त्रोटय त्रोटय दीप्तं कुरु कुरु स्वाहा॥
पां पीं पूं पार्वती पूर्णा खां खीं खूं खेचरी तथा॥ 8॥ 
सां सीं सूं सप्तशती देव्या मंत्रसिद्धिंकुरुष्व मे॥ 
इदंतु कुंजिकास्तोत्रं मंत्रजागर्तिहेतवे। 
अभक्ते नैव दातव्यं गोपितं रक्ष पार्वति॥ 
यस्तु कुंजिकया देविहीनां सप्तशतीं पठेत्‌।
 न तस्य जायते सिद्धिररण्ये रोदनं यथा॥ 
। इतिश्रीरुद्रयामले गौरीतंत्रे शिवपार्वती संवादे कुंजिकास्तोत्रं संपूर्णम्‌

गुप्त नवरात्री :-कौशल पाण्डेय +919968550003

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 आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का समय शाक्य एवं शैव धर्मावलंबियों के लिए पैशाचिक, वामाचारी क्रियाओं के लिए अधिक शुभ होता है। तंत्र साधकों के लिए यह समय महत्वपूर्ण है, इन दिनों दस महाविद्या की साधना कल्याणकारी सिद्ध होगी, जो मुक्ति का मार्ग बताती हैं उसे ‘विद्या’ कहते हैं। और जो भोग और मोक्ष दोनो देती है उसे महाविद्या कहते हैं। 

दस महा विद्या इस प्रकार है। इन महाविद्याओं के प्रकट होने की कथा महाभागवत देवी पुराण में वर्णित है। उनका रूप तथा कृपा फल कुछ ऐसा है।
 1. काली: दस महाविद्याओं में यह प्रथम है।कलियुग में इनकी पूजा अर्चना से शीघ्र फल मिलता है। 
 2. तारा: सर्वदा मोक्ष देने वाली और तारने वाली को तारा का नाम दिया गया है। सबसे पहले महर्षि वशिष्ठ ने मां तारा की पूजा की थी। आर्थिक उन्नति और बाधाओं के निवारण हेतु मां तारा महाविद्या का महत्वपूर्ण स्थान है। इसकी सिद्धि से साधक की आय के नित्य नये साधन बनते हैं। जीवन ऐश्वर्यशाली बनता है। इस की पूजा गुरुवार से आरंभ करनी चाहिये। इससे शत्रुनाश, वाणी दोष निवारण और मोक्ष की प्राप्ति होती है। 
 3. छिन्नमस्ता: मां छिन्नमस्ता का स्वरूप गोपनीय है। इनका सर कटा हुआ है। इनके बंध से रक्त की तीन धारायें निकल रही है। जिस में से दो धारायें उनकी सहस्तरीयां और एक धारा स्वयं देवी पान कर रही है। चतुर्थ, संध्या काल में छिन्नमस्ता की उपासना से साधक को सरस्वती की सिद्धि हो जाती है। राहु इस महाविद्या का अधिष्ठाता ग्रह है। 
 4. त्रिपुर भैरवी: आगम ग्रंथों के अनुसार त्रिपुर भैरवी एकाक्षर रूप है। शत्रु संहार एवं तीव्र तंत्र बाधा निवारण के लिये भगवती त्रिपुर भैरवी महाविद्या साधना बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इससे साधक के सौंदर्य में निखार आ जाता है। इस का रंग लाल है और यह लाल रंग के वस्त्र पहनती हैं। गले में मुंडमाला है तथा कमलासन पर विराजमान है। त्रिपुर भैरवी का मुख्य लाभ बहुत कठोर साधना से मिलता है। 
 5. धूमावती: धूमावती का कोई स्वामी नहीं है। इसकी उपासना से विपत्ति नाश, रोग निवारण व युद्ध में विजय प्राप्त होती है। 
6. बगलामुखी: शत्रु बाधा को पूर्णतः समाप्त करने के लिये बहुत महत्वपूर्ण साधना है। इस विद्या के द्वारा दैवी प्रकोप की शांति, धन-धान्य प्राप्ति, भोग और मोक्ष दोनों की सिद्धि होती है। इसके तीन प्रमुख उपासक ब्रह्मा, विष्णु व भगवान परशुराम रहे हैं। परशुराम जी ने यह विद्या द्रोणाचार्य जी को दी थी और देवराज इंद्र के वज्र को इसी बगला विद्या के द्वारा निष्प्रभावी कर दिया था। युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण के परामर्श पर कौरवों पर विजय प्राप्त करने के लिये बगलामुखी देवी की ही आराधना की थी। 
 7. षोडशी महाविद्या: शक्ति की सब से मनोहर सिद्ध देवी है। इन के ललिता, राज-राजेश्वरी महात्रिपुर सुंदरी आदि अनेक नाम हैं। षोडशी साधना को राजराजेश्वरी इस लिये भी कहा जाता है क्योंकि यह अपनी कृपा से साधारण व्यक्ति को भी राजा बनाने में समर्थ हैं। इनमें षोडश कलायें पूर्ण रूप से विकसित हैं। इसलिये इनका नाम मां षोडशी हैं। इनकी उपासना श्री यंत्र के रूप में की जाती है। यह अपने उपासक को भक्ति और मुक्ति दोनों प्रदान करती है। बुध इनका अधिष्ठातृ ग्रह है। 
 8. भुवनेश्वरी: महाविद्याओं में भुवनेश्वरी महाविद्या को आद्या शक्ति कहा गया है। मां भुवनेश्वरी का स्वरूप सौम्य और अंग कांतिमय है। मां भुवनेश्वरी की साधना से मुख्य रूप से वशीकरण, वाक सिद्धि, सुख, लाभ एवं शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। पृथ्वी पर जितने भी जीव हैं सब को इनकी कृपा से अन्न प्राप्त होता है। इसलिये इनके हाथ में शाक और फल-फूल के कारण इन्हें मां ‘शाकंभरी’ नाम से भी जाना जाता है। चंद्रमा इनका अधिष्ठातृ ग्रह है। 
 9. मातंगी: इस नौवीं महा विद्या की साधना से सुखी, गृहस्थ जीवन, आकर्षक और ओजपूर्ण वाणी तथा गुणवान पति या पत्नी की प्राप्ति होती है। इनकी साधना वाम मार्गी साधकों में अधिक प्रचलित है। 
 10. कमला: मां कमला कमल के आसन पर विराजमान रहती है। श्वेत रंग के चार हाथी अपनी संूडों में जल भरे कलश लेकर इन्हें स्नान कराते हैं। शक्ति के इस विशिष्ट रूप की साधना से दरिद्रता का नाश होता है और आय के स्रोत बढ़ते हैं। जीवन ‘सुखमय होता है। यह दुर्गा का सर्व सौभाग्य रूप है। जहां कमला है वहां विष्णु है। शुक्र इनका अधिष्ठातृ ग्रह है।

Pandit Kaushal Pandey

पित्र दोष कारन और निवारण :- कौशल पाण्डेय +919968550003

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