शनिवार, 9 मई 2015

सोमवती अमावश्या और वट सावित्री व्रत :- कौशल पाण्डेय 09968550003

सोमवती अमावश्या और वट सावित्री व्रत :- कौशल पाण्डेय 09968550003 सोमवती अमावश्या और वट सावित्री व्रत का संयोग 18 मई 2015 सोमवार के दिन है , भारतीय महिलाये प्राचीन काल से चली आ रही इस प्रता के अनुसार अपने पति के दीर्घ जीवी होने के लिए बरगद के पेड़ की पूजा और व्रत करती है , एक तरफ लोग बरगद (वट) के पेड़ की पूजा करती है और दूसरी तरफ लोग बरगद की टहनी तोड़कर अपने घरों में पूजा करते है जो गलत है ऐसा करने से बचे . जाकी रही भावना जैसी - स्कन्दपुराण में कहा गया है- अश्वत्थरूपी विष्णु: स्याद्वरूपी शिवो यत: अर्थात् पीपलरूपी विष्णु व जटारूपी शिव हैं। वट वृक्ष की जड़ों में ब्रह्मा जी, तने में विष्णु और डालियों एवं पत्तों में शिव का वास है। इसके नीचे बैठकर पूजन, व्रत कथा कहने और सुनने से मनोकामना पूरी होती है। अतः किसी मंदिर में या बरगद (वट) के पेड़ के नीचे बैठ कर ही इस दिन व्रत पूजा करे न की टहनी तोड़कर अपने घर में। अग्निपुराण के अनुसार बरगद उत्सर्जन को दर्शाता है। इसीलिए संतान के लिए इच्छित लोग इसकी पूजा करते हैं। इस कारण से बरगद काटा नहीं जाता है। अकाल में इसके पत्ते जानवरों को खिलाए जाते हैं। अपनी विशेषताओं और लंबे जीवन के कारण इस वृक्ष को अनश्‍वर माना जाता है। इसीलिए इस वृक्ष को अक्षयवट भी कहा जाता है। लोक मान्यता है कि बरगद के एक पेड़ को काटे जाने पर प्रायश्चित के तौर पर एक बकरे की बलि देनी पड़ती है। शास्त्रों में कहा गया है कि बड़ अमावश्य के दिन वट वृक्ष की पूजा से सौभाग्य एवं स्थायी धन और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। आज के दिन ही सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण की रक्षा की।सावित्री और सत्यवान की कथा से वट वृक्ष का महत्व लोगों को ज्ञात हुआ क्योंकि इसी वृक्ष ने सत्यवान को अपनी शाखाओं और शिराओं से घेरकर जंगली पशुओं से उनकी रक्षा की थी। इसी दिन से जेष्ठ कृष्ण अमावस्या के दिन वट की पूजा का नियम शुरू हुआ। शनि देव की कृपा पाने के लिए चाहें तो वट वृक्ष की जड़ों को दूध और जल से सींचें इससे त्रिदेव प्रसन्न होंगे और शनि का प्रकोप कम होगा। तथा धन और मोक्ष की चाहत पूरी होगी। वट वृक्ष की पूजा इसदिन आमतौर पर केवल महिलाएं करती हैं जबकि पुरूषों को भी इस दिन वट वृक्ष की पूजा करनी चाहिए। इसकी पूजा से वंश की वृद्घि होती है। आज के दिन खास उपाय :- जिन कन्याओं की शादी में रुकावटे आ रही है वो आज के दिन बरगद के पेड़ में कच्चा दूध चढ़ाये और गीली मिटटी से माथे पर टिका लगाये। कुंडली में पितृ बाधा के निवारण के लिए नदी के किनारे या किसी धर्म स्थल पर पीपल या बरगद का पेड़ लगाये और उसे रोजाना जल से सींचे जैसे जैसे पेड़ बड़ा होता रहेगा घर में खुशिया आती रहेगी अधिक जानकारी के लिए मिले अथवा संपर्क करे ; पंडित कौशल पाण्डेय 09968550003

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Pandit Kaushal Pandey

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