शनिवार, 30 जुलाई 2016

पूजा के समय भक्त का बैठने की दिशा :-पंडित कौशल पाण्डेय +919968550003

शिवलिंग पूजा के समय भक्त का बैठने की दिशा:-पंडित कौशल पाण्डेय


 शिवलिंग पूजा के समय किस दिशा और स्थान पर बैठना कामनाओं को पूरा करने की दृष्टि से विशेष फलदायी है।
1. जहां शिवलिंग स्थापित हो, उससे पूर्व दिशा की ओर चेहरा करके नहीं बैठना चाहिये क्योंकि यह दिशा भगवान शिव के आगे या सामने होती है और धार्मिक दृष्टि से देव मूर्ति या प्रतिमा का सामना या रोक ठीक नहीं होती।
2. शिवलिंग से उत्तर दिशा में भी न बैठे क्योंकि इस दिशा में भगवान शंकर का बायां अंग माना जाता है, जो शक्तिरूपा देवी उमा का स्थान है।
3. पूजा के दौरान शिवलिंग से पश्चिम दिशा की ओर नहीं बैठना चाहिए क्योंकि वह भगवान शंकर की पीठ मानी जाती है। इसलिए पीछे से देवपूजा करना शुभ फल नहीं देता।
4. इस प्रकार एक दिशा बचती है - वह है दक्षिण दिशा। इस दिशा में बैठकर पूजा, फल और इच्छापूर्ति की दृष्टि से श्रेष्ठ मानी जाती है।
5. सरल अर्थ में शिवलिंग के दक्षिण दिशा की ओर बैठकर यानि उत्तर दिशा की ओर मुंह कर पूजा और अभिषेक शीघ्र फल देने वाला माना गया है। इसलिए उज्जैन के दक्षिणमुखी महाकाल और अन्य दक्षिणमुखी शिवलिंग की पूजा का बहुत धार्मिक महत्व है।
6. शिवलिंग पूजा में सही दिशा में बैठने के साथ ही भक्त को भस्म का त्रिपुण्ड लगाना, रुद्राक्ष की माला पहनना और बिल्वपत्र अवश्य चढ़ाना चाहिए। अगर भस्म उपलब्ध न हो तो मिट्टी से भी मस्तक पर त्रिपुंड लगाने का विधान शास्त्रों में बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि जब सारे देवता श्रावण मास में शयन करते हैं तो भोलेनाथ का अपने भक्तों के प्रति वात्सल्य जागृत हो जाता है।

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पंडित कौशल पाण्डेय
श्री राम हर्षण शांति कुञ्ज , दिल्ली
+919968550003


  

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Pandit Kaushal Pandey

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