रक्षाबंधन का महापर्व 2016 :- पंडित कौशल पाण्डेय 09968550003
इस वर्ष रक्षाबंधन का त्यौहार 18 अगस्त 2016 , दिन गुरुवार को मनाया जाएगा.
पूर्णिमा तिथि का आरम्भ 17 अगस्त 2016 को दोपहर बाद से आरंभ होगा किंतु 16 :24 से 27:41 तक भद्रा व्याप्त रहेगी. इसलिए यह त्यौहार 18 अगस्त को मनाया जायेगा .
शुभ कार्य शुभ समय में किया जाता है, तो उस कार्य की शुभता में वृ्द्धि होती है. यह पर्व भी भाई- बहन के रिश्ते को अटूट बनाता है अतः राखी बांधने का कार्य शुभ मुहूर्त समय में करना चाहिए.
राखी बांधने का शुभ मुहूर्त
18 अगस्त को प्रातः 5:55 से 14:56 और 13:42 से 14:56 तक का समय शुभ है .
रक्षा-बंधन का पवित्र पर्व भद्रा रहित अपराह्न व्यापिनी पूर्णिमा में करने का शास्त्र विधान है- ‘‘भद्रायां द्वे न कत्र्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा ।’’
यदि पहले दिन अपराह्न काल भद्रा व्याप्त हो तथा दूसरे दिन उदयकालिक पूर्णिमा तिथि तीन मुहूत्र्त या तीन मुहूर्त से अधिक हो, तो उसी उदयकालिक पूर्णिमा (दूसरे दिन) के अपराह्न काल में रक्षाबंधन करना चाहिए। चाहे वह अपराह्न से पूर्व ही क्यों न समाप्त हो जाए।
‘‘ अथ रक्षाबन्धनमस्यामेव पूर्णिमायां भद्रारहितायां त्रिमुहूत्र्ताधिकोदय व्यापिनी अपराह्ने प्रदोषे वा कार्यम्।।’’ -धर्मसिन्धु
भाई बहन के अटूट रिश्तों का पर्व है रक्षाबंधन
भाई-बहन के बीच प्यार, मनुहार व तकरार होना एक सामान्य सी बात है। लेकिन रक्षा बंधन के दिन बहन द्वारा भाई के हाथ में बांधे जाने वाले रक्षा सूत्र में भाई के प्रति बहन के असीम स्नेह और बहन के प्रति भाई के कर्तव्यबोध को पिरोया गया है। प्रेम व कर्तव्य का यही भाव भाई-बहन के संबंधों को आजीवन मजबूती देता है। इस दिन बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगाती है, कलाई पर रक्षा सूत्र बांध उसकी आरती कर उसके दीर्घ जीवन की कामना करती है।
भाई भी बहन की झोली उपहारों से भरते हुए संकट की हर घड़ी में सहायता के लिए तत्पर रहने का वचन देता है।
रक्षा सूत्र कैसे बांधे :-
भारतीय संस्कृति में कथा, पूजा एवं विभिन्न संस्कारों के समय रक्षा सूत्र बांधने का विशेष महत्व है।
रक्षा के तीन सूत्र होते हैं जिन्हें तीन बार लपेट कर अधोलिखित मंत्र के साथ बांधा जाता है।
येन बद्धों बली राजा दान बेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।
भावार्थ :- जिस प्रकार लक्ष्मी जी ने राजा बली के हाथ में रक्षा सूत्र बांध कर अपने वचन से उन्हें बांध लिया उसी तरह मैं भी आपको अपनी रक्षा के लिए बांधती हूं।
इस रक्षा मंत्र के मूल में जो कथा आती है वह इस प्रकार है- दैत्यराज राजा बलि विष्णु का अनन्य भक्त था। एक बार देवराज इंद्र जब युद्ध में बली को नहीं हरा पाए तो वे मदद के लिए विष्णु भगवान के पास गए। विष्णु ने इंद्र व बलि के बीच समझौता कराते हुए बलि को इंद्र की ही तरह पाताल लोक का एकछत्र राज्य सौंपा और उसे अमरता का वरदान देते हुए पाताल लोक में उसके राज्य की रक्षा करने के लिए अपने वैकुंठ के राजपाट को छोड़कर स्वयं आने का वचन दिया। माता लक्ष्मी चाहती थीं कि विष्णु वैकुंठ वापस आ जाएं। इसी मंशा को लेकर माता लक्ष्मी भी एक ब्राह्मणी का वेश बनाकर राजा बलि के पास गईं और उनसे अनुरोध किया कि मेरे पति किसी जरूरी काम से बाहर देश की यात्रा पर गए हैं। जब तक वह लौट नहीं आते, मैं आपकी शरण में रहना चाहती हूं। बली ने ब्राह्मणी का प्रस्ताव खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया। श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर लक्ष्मी जी ने बलि की सुख समृद्धि की कामना के लिए उसकी कलाई में राखी बांधी।
ब्राह्मणी का आत्मीय व्यवहार बलि के अंतरतम को छू गया और उसने मन से ब्राह्मणी को अपनी बहन स्वीकार कर लिया तथा राखी के बदले में उपहार स्वरूप कुछ मांगने को कहा। तब माता लक्ष्मी ने अपनी असली पहचान बताई और अपने वहां रुकने का कारण बताते हुए कहा कि वह अपने पति के साथ वैकुंठ वापस जाना चाहती है। बलि ने उसी समय विष्णु से वैकुंठ जाने का अनुरोध कर अपनी बहन को दिए वायदे को पूरा किया। कहा जाता है कि इसी दिन से श्रावण पूर्णिमा के दिन बहनों को घर में आमंत्रित कर राखी बंधवाने का प्रचलन चल पड़ा।
रक्षा बंधन की पावनता से यमलोक भी अछूता नहीं है।
इस दिन मृत्यु के देवता यम को उनकी बहन यमुना ने राखी बांधी और अमर होने का वरदान दिया। यम ने इस पावन दिन के महत्व को अक्षुण्ण रखते हुए घोषणा की कि जो भाई इस दिन अपनी बहन से राखी बंधवाएगा और उसे रक्षा का वचन देगा वह हमेशा अमर रहेगा। एक दूसरे को स्नेह, सद्भावना एवं कर्तव्य के सूत्र में पिरोने वाले इस त्योहार के पीछे यह भाव है कि समाज में रहने वाले लोग एक दूसरे के साथ मिलजुल कर रहें और जरूरत पड़ने पर एक दूसरे की रक्षा के लिए आगे आएं।
यह त्योहार भाइयों को शक्तिशाली होने का बोध कराता है।
आज फ्रेंडशिप बैंड के रूप में राखी का आधुनिक स्वरूप भी नजर आ रहा है। फ्रेंडशिप बैंड को बांधने का अर्थ है एक-दूसरे के साथ भाई-बहन का सा वर्ताव कर आपसी रिश्तों की पावनता बनाए रखना। कुल मिलाकर इस त्योहार में भारतीय संस्कृति की अनूठी छवि के दर्शन होते हैं। सभी विश्व संस्कृतियों में केवल भारतीय संस्कृति ही ऐसी है जो पुरुषों को अपने विपरीतलिंगियों को मां और बहन की नजर से देखने की दृष्टि प्रदान करती है। इस भाव को सभी को नमन करना चाहिए।
इस वर्ष रक्षाबंधन का त्यौहार 18 अगस्त 2016 , दिन गुरुवार को मनाया जाएगा.
पूर्णिमा तिथि का आरम्भ 17 अगस्त 2016 को दोपहर बाद से आरंभ होगा किंतु 16 :24 से 27:41 तक भद्रा व्याप्त रहेगी. इसलिए यह त्यौहार 18 अगस्त को मनाया जायेगा .
शुभ कार्य शुभ समय में किया जाता है, तो उस कार्य की शुभता में वृ्द्धि होती है. यह पर्व भी भाई- बहन के रिश्ते को अटूट बनाता है अतः राखी बांधने का कार्य शुभ मुहूर्त समय में करना चाहिए.
राखी बांधने का शुभ मुहूर्त
18 अगस्त को प्रातः 5:55 से 14:56 और 13:42 से 14:56 तक का समय शुभ है .
रक्षा-बंधन का पवित्र पर्व भद्रा रहित अपराह्न व्यापिनी पूर्णिमा में करने का शास्त्र विधान है- ‘‘भद्रायां द्वे न कत्र्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा ।’’
यदि पहले दिन अपराह्न काल भद्रा व्याप्त हो तथा दूसरे दिन उदयकालिक पूर्णिमा तिथि तीन मुहूत्र्त या तीन मुहूर्त से अधिक हो, तो उसी उदयकालिक पूर्णिमा (दूसरे दिन) के अपराह्न काल में रक्षाबंधन करना चाहिए। चाहे वह अपराह्न से पूर्व ही क्यों न समाप्त हो जाए।
‘‘ अथ रक्षाबन्धनमस्यामेव पूर्णिमायां भद्रारहितायां त्रिमुहूत्र्ताधिकोदय व्यापिनी अपराह्ने प्रदोषे वा कार्यम्।।’’ -धर्मसिन्धु
भाई बहन के अटूट रिश्तों का पर्व है रक्षाबंधन
भाई-बहन के बीच प्यार, मनुहार व तकरार होना एक सामान्य सी बात है। लेकिन रक्षा बंधन के दिन बहन द्वारा भाई के हाथ में बांधे जाने वाले रक्षा सूत्र में भाई के प्रति बहन के असीम स्नेह और बहन के प्रति भाई के कर्तव्यबोध को पिरोया गया है। प्रेम व कर्तव्य का यही भाव भाई-बहन के संबंधों को आजीवन मजबूती देता है। इस दिन बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगाती है, कलाई पर रक्षा सूत्र बांध उसकी आरती कर उसके दीर्घ जीवन की कामना करती है।
भाई भी बहन की झोली उपहारों से भरते हुए संकट की हर घड़ी में सहायता के लिए तत्पर रहने का वचन देता है।
रक्षा सूत्र कैसे बांधे :-
भारतीय संस्कृति में कथा, पूजा एवं विभिन्न संस्कारों के समय रक्षा सूत्र बांधने का विशेष महत्व है।
रक्षा के तीन सूत्र होते हैं जिन्हें तीन बार लपेट कर अधोलिखित मंत्र के साथ बांधा जाता है।
येन बद्धों बली राजा दान बेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।
भावार्थ :- जिस प्रकार लक्ष्मी जी ने राजा बली के हाथ में रक्षा सूत्र बांध कर अपने वचन से उन्हें बांध लिया उसी तरह मैं भी आपको अपनी रक्षा के लिए बांधती हूं।
इस रक्षा मंत्र के मूल में जो कथा आती है वह इस प्रकार है- दैत्यराज राजा बलि विष्णु का अनन्य भक्त था। एक बार देवराज इंद्र जब युद्ध में बली को नहीं हरा पाए तो वे मदद के लिए विष्णु भगवान के पास गए। विष्णु ने इंद्र व बलि के बीच समझौता कराते हुए बलि को इंद्र की ही तरह पाताल लोक का एकछत्र राज्य सौंपा और उसे अमरता का वरदान देते हुए पाताल लोक में उसके राज्य की रक्षा करने के लिए अपने वैकुंठ के राजपाट को छोड़कर स्वयं आने का वचन दिया। माता लक्ष्मी चाहती थीं कि विष्णु वैकुंठ वापस आ जाएं। इसी मंशा को लेकर माता लक्ष्मी भी एक ब्राह्मणी का वेश बनाकर राजा बलि के पास गईं और उनसे अनुरोध किया कि मेरे पति किसी जरूरी काम से बाहर देश की यात्रा पर गए हैं। जब तक वह लौट नहीं आते, मैं आपकी शरण में रहना चाहती हूं। बली ने ब्राह्मणी का प्रस्ताव खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया। श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर लक्ष्मी जी ने बलि की सुख समृद्धि की कामना के लिए उसकी कलाई में राखी बांधी।
ब्राह्मणी का आत्मीय व्यवहार बलि के अंतरतम को छू गया और उसने मन से ब्राह्मणी को अपनी बहन स्वीकार कर लिया तथा राखी के बदले में उपहार स्वरूप कुछ मांगने को कहा। तब माता लक्ष्मी ने अपनी असली पहचान बताई और अपने वहां रुकने का कारण बताते हुए कहा कि वह अपने पति के साथ वैकुंठ वापस जाना चाहती है। बलि ने उसी समय विष्णु से वैकुंठ जाने का अनुरोध कर अपनी बहन को दिए वायदे को पूरा किया। कहा जाता है कि इसी दिन से श्रावण पूर्णिमा के दिन बहनों को घर में आमंत्रित कर राखी बंधवाने का प्रचलन चल पड़ा।
रक्षा बंधन की पावनता से यमलोक भी अछूता नहीं है।
इस दिन मृत्यु के देवता यम को उनकी बहन यमुना ने राखी बांधी और अमर होने का वरदान दिया। यम ने इस पावन दिन के महत्व को अक्षुण्ण रखते हुए घोषणा की कि जो भाई इस दिन अपनी बहन से राखी बंधवाएगा और उसे रक्षा का वचन देगा वह हमेशा अमर रहेगा। एक दूसरे को स्नेह, सद्भावना एवं कर्तव्य के सूत्र में पिरोने वाले इस त्योहार के पीछे यह भाव है कि समाज में रहने वाले लोग एक दूसरे के साथ मिलजुल कर रहें और जरूरत पड़ने पर एक दूसरे की रक्षा के लिए आगे आएं।
यह त्योहार भाइयों को शक्तिशाली होने का बोध कराता है।
आज फ्रेंडशिप बैंड के रूप में राखी का आधुनिक स्वरूप भी नजर आ रहा है। फ्रेंडशिप बैंड को बांधने का अर्थ है एक-दूसरे के साथ भाई-बहन का सा वर्ताव कर आपसी रिश्तों की पावनता बनाए रखना। कुल मिलाकर इस त्योहार में भारतीय संस्कृति की अनूठी छवि के दर्शन होते हैं। सभी विश्व संस्कृतियों में केवल भारतीय संस्कृति ही ऐसी है जो पुरुषों को अपने विपरीतलिंगियों को मां और बहन की नजर से देखने की दृष्टि प्रदान करती है। इस भाव को सभी को नमन करना चाहिए।






