शनिवार, 9 मई 2015

सोमवती अमावश्या और वट सावित्री व्रत :- कौशल पाण्डेय 09968550003

सोमवती अमावश्या और वट सावित्री व्रत :- कौशल पाण्डेय 09968550003 सोमवती अमावश्या और वट सावित्री व्रत का संयोग 18 मई 2015 सोमवार के दिन है , भारतीय महिलाये प्राचीन काल से चली आ रही इस प्रता के अनुसार अपने पति के दीर्घ जीवी होने के लिए बरगद के पेड़ की पूजा और व्रत करती है , एक तरफ लोग बरगद (वट) के पेड़ की पूजा करती है और दूसरी तरफ लोग बरगद की टहनी तोड़कर अपने घरों में पूजा करते है जो गलत है ऐसा करने से बचे . जाकी रही भावना जैसी - स्कन्दपुराण में कहा गया है- अश्वत्थरूपी विष्णु: स्याद्वरूपी शिवो यत: अर्थात् पीपलरूपी विष्णु व जटारूपी शिव हैं। वट वृक्ष की जड़ों में ब्रह्मा जी, तने में विष्णु और डालियों एवं पत्तों में शिव का वास है। इसके नीचे बैठकर पूजन, व्रत कथा कहने और सुनने से मनोकामना पूरी होती है। अतः किसी मंदिर में या बरगद (वट) के पेड़ के नीचे बैठ कर ही इस दिन व्रत पूजा करे न की टहनी तोड़कर अपने घर में। अग्निपुराण के अनुसार बरगद उत्सर्जन को दर्शाता है। इसीलिए संतान के लिए इच्छित लोग इसकी पूजा करते हैं। इस कारण से बरगद काटा नहीं जाता है। अकाल में इसके पत्ते जानवरों को खिलाए जाते हैं। अपनी विशेषताओं और लंबे जीवन के कारण इस वृक्ष को अनश्‍वर माना जाता है। इसीलिए इस वृक्ष को अक्षयवट भी कहा जाता है। लोक मान्यता है कि बरगद के एक पेड़ को काटे जाने पर प्रायश्चित के तौर पर एक बकरे की बलि देनी पड़ती है। शास्त्रों में कहा गया है कि बड़ अमावश्य के दिन वट वृक्ष की पूजा से सौभाग्य एवं स्थायी धन और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। आज के दिन ही सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण की रक्षा की।सावित्री और सत्यवान की कथा से वट वृक्ष का महत्व लोगों को ज्ञात हुआ क्योंकि इसी वृक्ष ने सत्यवान को अपनी शाखाओं और शिराओं से घेरकर जंगली पशुओं से उनकी रक्षा की थी। इसी दिन से जेष्ठ कृष्ण अमावस्या के दिन वट की पूजा का नियम शुरू हुआ। शनि देव की कृपा पाने के लिए चाहें तो वट वृक्ष की जड़ों को दूध और जल से सींचें इससे त्रिदेव प्रसन्न होंगे और शनि का प्रकोप कम होगा। तथा धन और मोक्ष की चाहत पूरी होगी। वट वृक्ष की पूजा इसदिन आमतौर पर केवल महिलाएं करती हैं जबकि पुरूषों को भी इस दिन वट वृक्ष की पूजा करनी चाहिए। इसकी पूजा से वंश की वृद्घि होती है। आज के दिन खास उपाय :- जिन कन्याओं की शादी में रुकावटे आ रही है वो आज के दिन बरगद के पेड़ में कच्चा दूध चढ़ाये और गीली मिटटी से माथे पर टिका लगाये। कुंडली में पितृ बाधा के निवारण के लिए नदी के किनारे या किसी धर्म स्थल पर पीपल या बरगद का पेड़ लगाये और उसे रोजाना जल से सींचे जैसे जैसे पेड़ बड़ा होता रहेगा घर में खुशिया आती रहेगी अधिक जानकारी के लिए मिले अथवा संपर्क करे ; पंडित कौशल पाण्डेय 09968550003

गुरुवार, 7 मई 2015

शनि अमावश्या के दिन करे दुखों का निवारण :- पंडित कौशल पाण्डेय 09968550003

शनि अमावश्या के दिन करे दुखों का निवारण :- पंडित कौशल पाण्डेय 09968550003 शनिवार 18 अप्रैल 2015 को अमावस्या तिथि है ,शास्त्रों के अनुसार शनिवार के दिन आने वाली अमावस्या को शनि अमावस्या कहते हैं। शनिवार के दिन अमावश्या आने से उसे शनिस्चरी अमावश्या बोलते है यह भी शनि भक्तो के लिए किसी संयोग से कम नहीं है , इस समय शनिदेव वृश्चिक राशी में वक्री चल रहे है , जैसा की आप सभी जानते है शनि देव मकर और कुम्भ राशी के स्वामी है और तुला राशी में अपना शुभ प्रभाव और मेष राशी में अपना अशुभ प्रभाव देते है , इस लिए आज के दिन शनि देव के मन्त्रों का जाप करते हुए पीपल के पेड़ की १०८ परिक्रमा करे या शनि धाम की परिक्रमा करे . जातक को अपने जन्म कुंडली में देखना चाहिये,यदि शनि चौथे,छठे,आठवें,बारहवें भाव मे किसी भी राशि में विशेषकर नीच राशि में बैठा हो,तो निश्चित ही आर्थिक,मानसिक,भौतिक पीडायें अपनी महादशा,अन्तर्दशा,में देगा,इसमे कोई सन्देह नही है,समय से पहले यानि महादशा,अन्तर्दशा,आरम्भ होने से पहले शनि के बीज मंत्र का अवश्य जाप कर लेना चाहिये.ताकि शनि प्रताडित न कर सके,और शनि की महादशा और अन्तर्दशा का समय सुख से बीते.याद रखें अस्त शनि भयंकर पीडादायक माना जाता है,चाहे वह किसी भी भाव में क्यों न हो. जिनकी कुंडली में शनि आशुभ है या जन्मकुंडली में शनि ग्रह अशुभ प्रभाव में होने पर व्यक्ति को निर्धन हो जाये , हर समय आलसी रहे , दुःखी, कम शक्तिवान, बार बार व्यापार में हानि उठाने वाला, जब शनि अशुभ फल देता है तो जातक नशीले पदार्थों का सेवन करने वाला बन जाता है , उसका दिमाक अच्छे कार्यों को नहीं करता जिसके कारन उसे जुआ खेलने , मैच में सट्टा लगाने या खिलाने वाला बन जाता है ,ऐसे जातक को कब्ज का रोगी, जोड़ों में दर्द से पीड़ित, वहमी , नास्तिक या बुरे कर्मो को करने वाला , बेईमान- धोखेबाज तिरस्कृत और अधर्मी बनता है , ऐसे जातक निम्न उपाय करे .. शनि ग्रह का उपाय … एक समय में केवल एक ही उपाय करें.उपाय कम से कम 40 दिन और अधिक से अधिक 43 दिनो तक करें.यदि किसी करणवश नागा हो तो फिर से प्रारम्भ करें., यदि कोइ उपाय नहीं कर सकता तो खून का रिश्तेदार ( भाई, पिता, पुत्र इत्यादि) भी कर सकता है.– १- ऐसे जातक को मांस , मदिरा, बीडी- सिगरेट नशीला पदार्थ आदि का सेवन न करे , २-हनुमान जी की पूजा करे , बंरंग बाण का पाठ करे , ३- पीपल को जल दे अगर ज्यादा ही शनि परेशां करे तो शनिवार के दिन शमसान घाट या नदी के किनारे पीपल का पेड़ लगाये , ४-सवा किलो सरसों का तेल किसी मिट्टी के कुल्डह में भरकर काला कपडा बांधकर किसी को दान दे दें या नदी के किनारे भूमि में दबाये . ५-शनि के मंत्र का प्रतिदिन १०८ बार पाठ करें। मंत्र है ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः। या शनिवार को शनि मन्त्र ॐ शनैश्वराय नम का २३,००० जाप करे . ६- उडद के आटे के 108 गोली बनाकर मछलियों को खिलाने से लाभ होगा , ७-बरगद के पेड की जड में गाय का कच्चा दूध चढाकर उस मिट्टी से तिलक करे तो शनि अपना अशुभ प्रभाव नहीं देगा , ८- श्रद्धा भाव से काले घोडे की नाल या नाव की कील का छल्ला मध्यमा अंगुली में धारण करें या शनिवार सरसों के तेल की मालिश करें, ९- शनिवार को शनि ग्रह की वस्तुओं का दान करें, शनि ग्रह की वस्तुएं हैं –काला उड़द,चमड़े का जूता, नमक, सरसों तेल, तेल, नीलम, काले तिल, लोहे से बनी वस्तुएं, काला कपड़ा आदि। १०-शनिवार के दिन पीपल वृक्ष की जड़ पर तिल या सरसों के तेल का दीपक जलाएँ। ११- गरीबों, वृद्धों एवं नौकरों के प्रति अपमान जनक व्यवहार नहीं करना चहिए. १२-शनिवार को साबुत उडद किसी भिखारी को दान करें.या पक्षियों को ( कौए ) खाने के लिए डाले , १३-ताऊ एवं चाचा से झगड़ा करने एवं किसी भी मेहनतम करने वाले व्यक्ति को कष्ट देने, अपशब्द कहने से कुछ लोग मकान एवं दुकान किराये से लेने के बाद खाली नहीं करते अथवा उसके बदले पैसा माँगते हैं तो शनि अशुभ फल देने लगता है। १४- बहते पानी में रोजाना नारियल बहाएँ। या किसी बर्तन में तेल लेकर उसमे अपना क्षाया देखें और बर्तन तेल के साथ दान करे. क्योंकि शनि देव तेल के दान से अधिक प्रसन्ना होते है, अपना कर्म ठीक रखे तभी भाग्य आप का साथ देगा और कर्म कैसे ठीक होगा इसके लिए आप मन्दिर में प्रतिदिन दर्शन के लिए जाएं.,माता-पिता और गुरु जानो का सम्मान करे ,अपने धर्मं का पालन करे,भाई बन्धुओं से अच्छे सम्बन्ध बनाकर रखें. पितरो का श्राद्ध करें. या प्रत्येक अमावस को पितरो के निमित्त मंदिर में दान करे,गाय और कुत्ता पालें, यदि किसी कारणवश कुत्ता मर जाए तो दोबारा कुत्ता पालें. अगर घर में ना पाल सके तो बाहर ही उसकी सेवा करे,यदि सन्तान बाधा हो तो कुत्तों को रोटी खिलाने से घर में बड़ो के आशीर्वाद लेने से और उनकी सेवा करने से सन्तान सुख की प्राप्ति होगी .गौ ग्रास. रोज भोजन करते समय परोसी गयी थाली में से एक हिस्सा गाय को, एक हिस्सा कुत्ते को एवं एक हिस्सा कौए को खिलाएं आप के घर में हमेसा बरक्कत रहेगी.

माँ बगलामुखी :- पंडित कौशल पाण्डेय 09968550003

आदी शक्ति माँ बगलामुखी जयंती की हार्दिक शुभकामनायें :- पंडित कौशल पाण्डेय वैशाख शुक्ल अष्टमी को देवी बगलामुखी का अवतरण दिवस कहा जाता है जिस कारण इसे मां बगलामुखी जयंती के रूप में मनाया जाता है. आज दिनाक 26 अप्रैल 2015 रविवार के दिन यह पर्व मनाया जा रहा है आज के दिन व्रत एवं पूजा उपासना कि जाती है साधक को माता बगलामुखी की नित्य पूजा अर्चना और मंत्र जाप करना चाहिए. इस अवसर पर आज श्री राम हर्षण शांति कुञ्ज संस्था के द्वारा माँ बगलामुखी का अनुष्ठान का आयोजन किया जायेगा माँ बगलामुखी का पूर्ण और शुद्ध नाम वल्गामुखि है। वल्गा का मतलब होता है लगाम और वल्गामुखि अर्थात लगाम लगा देने वाली या रोक देने वाली अर्थात स्तंभित कर देने वाली। बग्लामुखी या बगलामुखी माता, वल्गामुखी के नाम का ही अपभ्रंश है। माँ बगलामुखी को पीताम्बरा के नाम से भी जाना जाता है पीताम्बरा अर्थात माता का ऐसा स्वरुप जो पीत (अर्थात पीला) वस्त्रों से, पीत आभूषणों से, स्वर्ण आभूषणों से, और पीत पुष्पों से सुसज्जित है सजा हुआ है, माँ के चेहरे पर स्वर्ण के समान आभा शोभायमान है। माँ बगलामुखी को पीला रंग बहुत प्रिय है । माँ बगलामुखी इस संपूर्ण ब्रहमांड की दस सर्वश्रेष्ठ शक्तियों में से एक है अर्थात माँ बगलामुखी दस महाविद्याओं में से आठवी महाविद्या है । माँ पीताम्बरा इस कलयुग की अधिष्ठात्री देवी है । इस कलयुग में माँ की पूजा शीघ्र फलदाई होती है । माँ बगलामुखी इस ब्रहमांड की स्तम्भन शक्ति की अधिष्ठात्री देवी । मंत्र :- ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्व दुष्टानाम वाचं मुखं पदम् स्तम्भय जिह्वाम कीलय बुद्धिम विनाशाय ह्लीं ॐ नम:

प्यासे परिंदो को पानी पिलाये :- पंडित कौशल पाण्डेय +919968550003

प्यासे परिंदो को पानी पिलाये :- पंडित कौशल पाण्डेय +919968550003


गर्मियों में कई परिंदों या जानवरों की मौत पानी की कमी के कारण हो जाती है। हमारा थोड़ा सा प्रयास घरों के आस-पास उडऩे वाले परिंदों की प्यास बुझा सकता है। साथ ही इन्हें जिंदगी मिल सकती है और भीषण गर्मी में भी इनका भविष्य सुरक्षित रह सकता है। यह एक ऐसा शुभ कार्य है जिसको करने से और दूसरों को कराने से पुण्य मिलता है आप के भाग्य का निर्माण होता है। 

जो लोग ऐसे शुभ कार्य करते हैं उनकी 7 पीढ़ियों तक लक्ष्मी मेहरबान रहती इतनी महिमा बताई गई है। 

राशियों के हिसाब से चिड़यों को या पशुओं को किस रंग का पदार्थ दान करे - 
मेष , वृश्चिक , सिंह राशि वाले लाल पदार्थ का दान करे 
 वृष , कर्क ,तुला राशि वाले सफ़ेद पदार्थ का दान करे 
 मिथुन और कन्या राशि वाले हरे पदार्थ का दान करे 
 धनु और मीन राशि वाले पीले पदार्थ का दान करे 
 मकर और कुम्भ राशि वाले काले पदार्थ का दान करे 

रोगी के लिए जौ और सतनाजा का दान उत्तम रहता है कर्ज मुक्ति के लिए जिसे इन्शान के ऊपर कर्ज है वो अपनी नाम राशि के अनुसार पदार्थ ले उसे एक मिटटी के बर्तन में रात को भिगोकर सिरहाने रखे और अगले दिन उसे कबूतरों को खिलाये। 

गाय को चारा खिलाना :- कई लोग भोजन बनाते समय पहली रोटी गाय के लिए निकालते है और एक रोटी गाय को खिला देते है अपना तो भर पेट भोजन कर लिए और गऊ माता को सिर्फ एक रोटी किसी भी जीव को जब भी भोजन कराओ भरपेट कराओ इससे अच्छा तो कराओ ही न इसलिए गाय को रोटी के साथ हरा चारा या भूस डाले जिससे उसकी भूख मिट सके और आप को उसका पूर्ण फल मिले। 

घर में अगर अगर बरक्कत नहीं हो रही है तो करे यह उपाय :- सवा किलो आंटा ले उसमे घी मिलाकर कड़ाही में भून ले इसके बाद जब वो ठंडा हो जाये तो उसमे लाल शक्कर मिलाये और परिवार के जितने सदस्य है उन सभी का हाँथ लगवाकर उसे किसी जार में रख दे और और परिवार का कोई भी सदस्य रोज 41 तक उस जार से थोड़ा थड़ा आंटा चीटिंयों को खिलाये ऐसा करने अवश्य धन धान्य की वृद्धि होगी। 

जिनकी कुंडली में शनि की दशा या शनि की साढ़ेसात्ति चल रही है ऐसे लोग कौवे या कुत्ते को रोटी में सरसों का तेल लगाकर हर शनिवार को खिलाये प्रसिद्धि पाने के लिए मछलियों को और कछुये को चारा डाले , कोई भी उपाय करे उसे लगातार करे घर का कोई भी सदस्य किसी के भी निमित्त उपाय कर सकता है काम से काम 40 या 41 दिन दान करने से सिर्फ एक पीढ़ी का नहीं बल्कि सात पीढिय़ों तक का कल्याण होता है। आशा है की आप सब मेरे इस उपाय से अवश्य लाभ प्राप्त करेंगे अधिक जानकारी या कोई भी सुझाव के लिए संपर्क कर सकते है 

अधिक जानकारी के लिए मिले अथवा संपर्क करे 
पंडित कौशल पाण्डेय
श्री राम हर्षण शांति कुञ्ज , दिल्ली
+919968550003

रविवार, 7 दिसंबर 2014

अंक ज्योतिष :- पंडित कौशल पाण्डेय +919968550003


#अंक ज्योतिष :- पंडित कौशल पाण्डेय +919968550003 



अंक ज्योतिष के अनुसार जन्म तारीख के कुल योग को मूलांक कहते है , DD :MM :YYYY के कुल योग को भाग्यांक कहते है, मूलांक और भाग्यांक के अनुसार काम करने से जीवन में रुके हुए काम पुरे होते चले जाते है :- अंकज्योतिष में नौ ग्रहों सूर्य, चन्द्र, गुरू, यूरेनस, बुध, शुक्र, वरूण, शनि और मंगल की विशेषताओं के आधार पर गणना की जाती है।

इन में से प्रत्येक ग्रह के लिए 1 से लेकर 9 तक कोई एक अंक निर्धारित किया गया है, कौन से ग्रह पर किस अंक का असर होता है। ये नौ ग्रह मानव जीवन पर गहरा प्रभाव डालते हैं। 

आइये जाने किस अंक का कौन स्वामी है :- 
जन्म तारीख 1, 10, 19, 28 का मूलांक 1 का स्वामी सूर्य है 
2, 11, 20, 29 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक- 2 स्वामी चंद्रमा
 3, 12, 21, 30 मूलांक- 3, स्वामी गुरू
 4, 13, 22, 31 मूलांक 4 का स्वामी- राहु 
5, 14, 23 मूलांक 5 स्वामी बुध 
6, 15, 24 मूलांक 6 स्वामी शुक्र 
7, 16, 25 मूलांक 7 स्वामी केतु 
8, 17, 26 मूलांक 8 स्वामी- शनि- 
9, 18, 27 मूलांक 9 स्वामी मंगल 

आइये जाने भाग्यशाली अंक, अंको के रंग और शुभ दिशा मूलांक 
1 : यह अंक स्वतंत्र व्यक्तित्व का धनी है। इससे संभावित अंह का बोध, आत्म निर्भरता, प्रतिज्ञा, दृढ़ इच्छा शक्ति एवं विशिष्ट व्यक्तित्व दृष्टि गोचर होता है। इसके स्वामी सूर्य हैं. जिस व्यक्ति का जन्म समय 21 जुलाई से 28 अगस्त के मध्य हो, का प्रभाव सूर्य के नियंत्रण में होता है, 

इनके लिए शुभ तिथि 1,10,19 एवं 28 तारीख है. चार अंक से इनका जबरदस्त आकर्षण होता है. इनके लिए शुभ दिन रविवार एवं सोमवार है, तो शुभ रंग पीला, हरा एवं भूरा है. ये अपने ऑफिस, शयनकक्ष परदे, बेडशीट एवं दीवारों के रंग इन्हीं रंगों में करें, तो भाग्य पूर्णत: साथ देता है. इस मूलांक के व्यक्ति शासन के शीर्ष पद पर देखे जाते हैं. छह एवं आठ अंक वाले इनके शत्रु हैं. इनकी शुभ दिशा ईशान कोण है. 

मूलांक 2 : अंक दो का संबंध मन से है। यह मानसिक आकर्षण, हृदय की भावना, सहानुभूति, संदेह, घृणा एवं दुविधा दर्शाता है। इसका प्रतिनिधित्व चन्द्र को मिला है, इस अंक का स्वामी चंद्रमा है 2,11, 20, 29 तारीख अति शुभ हैं. रविवार, सोमवार एवं शुक्रवार श्रेष्ठ दिन हैं. सफेद एवं हल्का हरा इनके शुभ रंग हैं.

 मूलांक 3 : इस अंक के स्वामी देव गुरु वृहस्पति हैं .इससे बढ़ोत्तरी, बुद्धि विकास क्षमता, धन वृद्धि एवं सफलता मिलती है। 3, 12, 21 एवं 30 तारीख इनके लिए विशेष शुभ हैं. मंगलवार, गुरुवार एवं शुक्रवार श्रेष्ठ है. पीला एवं गुलाबी रंग अतिशुभ है. शुभ माह जनवरी एवं जुलाई है. दक्षिण, पश्चिम एवं अग्नि कोण श्रेष्ठ दिशा है. 

मूलांक 4 : इस अंक से मनुष्य की हैसियत, भौतिक सुख संपदा, सम्पत्ति, कब्जा, उपलब्धि एवं श्रेय प्राप्त होता है। इसका प्रतिनिधि हर्षल और राहु हैं. 2, 11, 20 एवं 29 तारीख शुभ है. रविवार, सोमवार एवं शनिवार श्रेष्ठ दिन हैं, जिसमें शनिवार सर्वश्रेष्ठ है. नीला एवं भूरा रंग शुभ है. 

मूलांक 5 : इस अंक का स्वामी बुध है. शुभ तिथि 5, 14 एवं 23 है. सोमवार, बुधवार एवं शुक्रवार श्रेष्ठ है. उसमें शुक्रवार सर्वाधिक शुभ है. सफेद, खाकी एवं हल्का हरा रंग इनके लिए शुभ है. इनके लिए अशुभ अंक 2, 6 और 9 है. 

मूलांक 6 : इस अंक का स्वामी शुक्र है. छह का अंक वैवाहिक जीवन, प्रेम एवं प्रेम-विवाह, आपसी संबंध, सहयोग, सहानुभूति, संगीत, कला, अभिनय एवं नृत्य का परिचायक है।शुभ तिथि माह की 6,15 एवं 24 तारीख है. मंगलवार, गुरुवार एवं शुक्रवार श्रेष्ठ दिन है जिसमें शुक्रवार सर्वश्रेष्ठ है. आसमानी, हल्का एवं गहरा नीला एवं गुलाबी रंग शुभ हैं. लाल एवं काले रंग का प्रयोग वर्जित है. 

मूलांक 7 : इस अंक का स्वामी केतु है. सात का अंक आपसी ताल मेल, साझेदारी, समझौता, अनुबंध, शान्ति, आपसी सामंजस्य एवं कटुता को जन्म देता है।महीना के 7, 16 एवं 25 तारीख सर्वश्रेष्ठ है. 21 जून से 25 जुलाई तक का समय भी श्रेष्ठ है. रविवार, सोमवार एवं बुधवार श्रेष्ठ हैं. जिसमें सोमवार सर्वश्रेष्ठ है. शुभ रंग हरा, सफेद एवं हल्का पीला है. 

मूलांक 8 : इस अंक का स्वामी शनि हैं. 8, 17 एवं 26 तारीख श्रेष्ठ तिथि हैं.शनि का अंक होने से इस अंक से क्षीणता, शारीरिक मानसिक एवं आर्थिक कमजोरी, क्षति, हानि, पूर्ननिर्माण, मृत्यु, दुःख, लुप्त हो जाना या बहिर्गमन हो जाता है, रविवार, सोमवार एवं शनिवार शुभ हैं. जिसमें शनिवार सर्वाधिक शुभ है. भूरा, गहरा नीला, बैगनी, सफेद एवं काला शुभ रंग है. हृदय एवं वायु रोग इनके प्रभाव क्षेत्र हैं. दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम एवं दक्षिण-पूर्व दिशा शुभ हैं. 

मूलांक 9 : अंक नौ का स्वामी मंगल है. इस मूलांक के लोगों पर मंगल ग्रह का प्रभाव सर्वाधिक है.यह अन्तिम ईकाई अंक होने से संघर्ष, युद्ध, क्रोध, ऊर्जा, साहस एवं तीव्रता देता है। इससे विभक्ति, रोष एवं उत्सुकता प्रकट होती है। इसका प्रतिनिधि मंगल ग्रह है जो युद्ध का देवता है 9, 18 एवं 27 श्रेष्ठ तारीख है. मंगलवार, गुरुवार एवं शुक्रवार शुभ दिन है. गहरा लाल एवं गुलाबी शुभ रंग है. पूर्व, उत्तर-पूर्व एवं उत्तर-पश्चिम दिशा अतिशुभ हैं. हनुमान जी की अराधना श्रेष्ठ है.

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पंडित कौशल पाण्डेय
श्री राम हर्षण शांति कुञ्ज , दिल्ली
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राहुकाल:- पंडित कौशल पाण्डेयl +919968550003


राहुकाल- पंडित कौशल पाण्डेय




 राहुकाल में शुभकार्य करना वर्जित हैं। ऐसा माना जाता है कि यह समय क्रुर ग्रह राहु के नाम से है जो पाप ग्रह माना गया है। इसलिए इस समय में जो भी कार्य किया जाता है वो पाप ग्रस्त हो जाता है और असफल हो जाता है। 

रविवार को शाम 04:30 से 06 बजे तक राहुकाल होता है। 
सोमवार को दिन का दूसरा भाग यानि सुबह 07:30 से 09 बजे तक राहुकाल होता है। 
मंगलवार को दोपहर 03:00 से 04:30 बजे तक राहुकाल होता है। 
बुधवार को दोपहर 12:00 से 01:30 बजे तक राहुकाल माना गया है। 
गुरुवार को दोपहर 01:30 से 03:00 बजे तक का समय यानि दिन का छठा भाग राहुकाल होता है। 
शुक्रवार को दिन का चौथा भाग राहुकाल होता है। यानि सुबह 10:30 बजे से 12 बजे तक का समय राहुकाल है। शनिवार को सुबह 09 बजे से 10:30 बजे तक के समय को राहुकाल माना गया है। 

कई बार हम कही घर से बहार जाते है और हमें बिना कारन ही परेशानी होती है , वो दिशा शूल होता है , आप अपनी यात्रा को सुखद पूर्वक और मंगलमय बनाने के लिए ये उपाय करे - सोमवार और शनिवार को पूर्व (East) दिशा रविवार और शुक्रवार को पश्चिम (West) दिशा मंगल वार और बुधवार को उत्तर (North( दिशा गुरु वार को दक्षिण (South) दिशा सोमवार और गुरूवार को (अग्ने ) south east रविवार और शुक्रवार को (नेतरअगये ) south west मंगलवार को (वायवे ) north west बुध और शनि को (ईशान ) north east दिशा शूल होता है| अर्थात इस दिन इन दिशायो की और यात्रा नहीं करनी चाहिए|बुध को उत्तर दिशा का स्वामी होते हुए भी बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा निषिद है| दिशा शूल से बचा जा सकता है और आप अपनी यात्रा को मंगलमय बना सकते है| रविवार = दलिया और घी खा करे जाये . सोमवार = दर्पण देख कर जाये . मंगलवार = गुड खा कर जाये . बुधवार = धनिया या तिल खा कर जाये . वीरवार = दही खा कर जाये . शुक्रवार = जों खा कर जाये . शनिवार = अदरक या उड़द खा कर जाये .

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पंडित कौशल पाण्डेय
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मांगलिक दोष या योग :- पंडित कौशल 09968550003


मांगलिक दोष या योग :- पंडित कौशल अधिकांश ज्योतिषी सिर्फ मंगल ग्रह को १,४,७,८,१२ भाव में होने से ऐसे जातक की कुंडली में मांगलिक दोष बता देते है साथ में ये भी बता देते है की कोई शुभ ग्रह देख रहा हो तो दोष हट जाता है या कुछ साल के बाद मंगल अपना प्रभाव नहीं दिखाता है , मांगलिक दोष की अनेक भ्रान्तिया इस समाज में फैली है अगर लड़का मांगलिक है तो उसे मांगलिक से ही विवाह करना चाहिए या उसे पत्नी सुख नहीं मिलेगा मेरे हिसाब से ऐसा कुछ नहीं है ज्योतिष में मंगल को सेनापति कहा गया है और यह ऊर्जावान ग्रह हैं, जिसे लोग मांगलिक दोष मान रहे हैं वो दोष नहीं बल्कि एक मांगलिक योग है। दांपत्य जीवन में स्त्री तथा पुरुष दोनों को समान रूप से प्रभावित करने वाले ग्रह की दोषपूर्ण स्थिति को मंगल दोष नाम दे दिया गया। ज्योतिषीय सिद्धांतों के अनुसार अशुभ ग्रह जिस भाव में बैठते हैं, उसी की हानि करते हैं। अतः भावी वर, या वधू की कंडली में लग्न भाव (शरीर), सुख भाव (चतुर्थ भाव) दांपत्य भाव (सप्तम भाव) आयु भाव (अष्टम स्थान) तथा शैय्या सुख भाव (द्वादश स्थान) में पाप ग्रहों की स्थिति दांपत्य जीवन के लिये दुःखद कही गयी है। अष्टम भाव से वैधव्य, लग्न से शरीर सुख, सप्तम से सौभाग्य तथा पंचम से संतानोत्पत्ति का विचार होता है। लग्नस्थ पाप ग्रह शरीर को रोगी करते हैं। वे शरीर के लिए कष्टकारक होते हैं। अष्टम भाव पति/पत्नी का मारक स्थान है। इस स्थान में पाप ग्रहों का होना आयु के लिए हानिकारक है।

Pandit Kaushal Pandey

पित्र दोष कारन और निवारण :- कौशल पाण्डेय +919968550003

पित्र दोष कारन और निवारण :- कौशल पाण्डेय +919968550003  ज्योतिष शास्त्र में अनेक योग ऐसे है कि उनसे पता चलता है कि हमारे जीवन में जन्म से पू...